रोहित कश्यप, मुंगेली। कलेक्ट्रेट मुंगेली के पर्यावरण अधोसंरचना विकास उपकर खाते से 26 लाख 87 हजार रुपये के अनधिकृत ट्रांजेक्शन मामले में अब बड़ा प्रशासनिक मोड़ आ गया है। ताज़ा अपडेट में कलेक्टर कुंदन कुमार ने स्वयं संज्ञान लेते हुए इसे बेहद गंभीर फाइनेंशियल फ्रॉड करार दिया है और स्पष्ट कहा है कि “यदि शासकीय खाते से एक सेकंड के लिए भी बिना खाताधारक की अनुमति के राशि निजी खाते में जाती है, तो वह गंभीर धोखाधड़ी की श्रेणी में आती है।” यह खाता सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, शाखा मुंगेली में संचालित था। मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने बैंक प्रबंधन से विस्तृत जवाब मांगा है।

रकम वापस जमा होना मुद्दा नहीं, फ्रॉड होना मुद्दा है – कलेक्टर
कलेक्टर ने साफ कहा कि यह तर्क स्वीकार्य नहीं है कि बाद में राशि वापस खाते में जमा करा दी गई। सवाल यह है कि बिना खाताधारक की अनुमति 26 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ कैसे? जांच में सामने आया कि कुल तीन बड़े ट्रांजेक्शन (लगभग 9 लाख, 8 लाख और करीब 6 लाख रुपये) किए गए, जबकि बैंक की ओर से कुल 6 ट्रांजेक्शन दर्ज हुए। कलेक्टर ने इस पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि के ट्रांजेक्शन में शाखा प्रबंधक की आईडी का उपयोग अनिवार्य होता है। ऐसे में केवल एक कर्मचारी द्वारा, वह भी “लंच टाइम” में ट्रांजेक्शन कर देने की दलील बचकानी और गैर-जिम्मेदाराना है।
उन्होंने कहा कि गोलमोल जवाब से बैंक प्रबंधन की भूमिका पर उठ रहे सवाल खत्म नहीं होते। यदि प्रबंधक की आईडी के बिना ट्रांजेक्शन संभव नहीं, तो जिम्मेदारी तय होना ही चाहिए।
खाताधारक को जानकारी तक नहीं
जानकारी के मुताबिक यह खाता अपर कलेक्टर जी.एल. यादव के प्रभार में अधोसंरचना मद का था और संबंधित राशि वर्ष 2019-20 की बताई जा रही है। वित्त सचिव द्वारा इस राशि को सरकारी खजाने में जमा करने के निर्देश दिए जाने के बाद जब खाताधारक का e-KYC किया गया, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। प्रशासन का सीधा सवाल है – खाताधारक की अनुमति और जानकारी के बिना इतनी बड़ी राशि निजी खातों में कैसे चली गई? अब तक बैंक का जवाब केवल इतना है कि संबंधित कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है। लेकिन प्रशासन के अनुसार, यह जवाब पर्याप्त नहीं है। असली प्रश्न यह है कि सिस्टम में चूक कैसे हुई और किस स्तर पर हुई?
विजिलेंस जांच शुरू, कड़ी कार्रवाई के संकेत
सूत्रों के मुताबिक, मामले की जांच अब विजिलेंस टीम द्वारा की जा रही है। प्रशासन द्वारा बैंक प्रबंधन से मांगे गए दस्तावेज़ और पूर्ण स्टेटमेंट अब तक संतोषजनक रूप से प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, जिसे प्रशासन ने गंभीर अनियमितता माना है। कलेक्टर ने संकेत दिए हैं कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय है।
यह मामला न केवल शासकीय धन की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि बैंकिंग निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता पर भी गंभीर चिंता उत्पन्न करता है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और प्रशासन की कार्रवाई इस पूरे प्रकरण को और स्पष्ट करेगी।
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