मुंगेर। जिले में एक शिक्षिका के पहनावे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तूल पकड़ चुका है। इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कुणाल गौरव पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगे थे, जिस पर बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया था। बुधवार को DEO ने पटना स्थित महिला आयोग के कार्यालय में उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण दिया और सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
DEO का दावा: सुधार की मुहिम को रोकने की साजिश
महिला आयोग की अध्यक्ष प्रो. अश्वमेध देवी (अप्सरा) के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए DEO कुणाल गौरव ने कहा कि जिले की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए जा रहे निरीक्षणों से कुछ लोग बौखलाए हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार और मनगढ़ंत हैं। DEO के अनुसार, यह उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और विभागीय कार्यों में बाधा डालने की एक सुनियोजित कोशिश है।
शिक्षक संघ और बर्खास्त शिक्षक पर निशाना
DEO ने इस पूरे विवाद के पीछे शिक्षक संघ के कुछ पदाधिकारियों का हाथ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक बर्खास्त पूर्व शिक्षक, जो वर्तमान में शिक्षक संघ के नाम पर अवैध वसूली और राजनीति में संलिप्त है, इस भ्रामक खबर को फैलाने का मुख्य सूत्रधार है। DEO का कहना है कि उक्त व्यक्ति ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए संबंधित शिक्षिका को गुमराह किया और मामले को अनावश्यक तूल देकर सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में गलत जानकारी प्रसारित की।
क्या था मुख्य विवाद?
विवाद की शुरुआत 11 मार्च को हुई, जब DEO कार्यालय द्वारा हवेली खड़गपुर प्रखंड की एक वरीय शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस (शोकॉज) जारी किया गया था। दरअसल, ‘ई-शिक्षा कोष’ पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज करने के दौरान शिक्षिका द्वारा अपलोड की गई ‘सेल्फी’ में उनके पहनावे को लेकर DEO ने आपत्ति जताई थी। पत्र में उल्लेख था कि सेल्फी में दिख रही ड्रेस अमर्यादित है और एक शिक्षिका के आचरण के अनुकूल नहीं है। इसी स्पष्टीकरण पत्र पर प्राथमिक शिक्षक संघ के मुख्य संरक्षक अमित विक्रम ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, जिसे बाद में महिला आयोग तक ले जाया गया।
शिक्षिका का पक्ष और खेद प्रकट करना
दूसरी ओर, संबंधित शिक्षिका ने अपने शोकॉज जवाब में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि निरीक्षण के समय अत्यधिक ठंड थी, जिसके कारण उन्होंने गर्म कपड़े पहन रखे थे। उन्होंने बताया कि दुपट्टा उनके सूट के साइड में था, जो सेल्फी लेते समय कैमरे के एंगल की वजह से स्पष्ट रूप से फोटो में नहीं आ पाया। शिक्षिका ने किसी भी प्रकार की अमर्यादित मंशा से इनकार करते हुए भविष्य में इस संबंध में सावधानी बरतने की बात कही और खेद व्यक्त किया। फिलहाल, महिला आयोग दोनों पक्षों की दलीलों की समीक्षा कर रहा है।
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