मुजफ्फरपुर। जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई में तत्कालीन जिला कृषि पदाधिकारी (DAO) सुधीर कुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विशेष निगरानी कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। सुधीर कुमार को साहेबगंज के प्रखंड तकनीकी प्रबंधक (BTM) संतोष कुमार से 19 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब उनके जेल में ही रहने की संभावना प्रबल हो गई है।

​चार्जशीट और FSL रिपोर्ट में पुख्ता सबूत

​विशेष लोक अभियोजक कृष्णदेव साह ने जानकारी दी कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले की जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसके साथ ही 180 पन्नों की केस डायरी और 30 पन्नों की एफएसएल (FSL) रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी गई है। वैज्ञानिक साक्ष्यों वाली यह रिपोर्ट रिश्वत कांड में आरोपी की संलिप्तता की पुष्टि करती है, जिससे सुधीर कुमार का पक्ष और कमजोर हो गया है।

​छापेमारी में मिली करोड़ों की संपत्ति

​गिरफ्तारी के बाद जब निगरानी की टीम ने सुधीर कुमार के ठिकानों पर छापेमारी की, तो वहां से अकूत संपत्ति का खुलासा हुआ। तलाशी के दौरान अधिकारी के घर से 14 लाख रुपए नकद, करीब 31.18 लाख रुपए के सोने के जेवरात, साथ ही हीरे और चांदी के आभूषण बरामद किए गए थे। इन बरामदगियों ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

​अब विभागीय अनुमति का इंतजार

​भ्रष्टाचार के इस मामले में अब कानूनी प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है। नियमानुसार, चार्जशीट पर संज्ञान लेने से पहले कृषि विभाग के सचिव से मुकदमा चलाने की औपचारिक स्वीकृति मिलना अनिवार्य है। विभाग से हरी झंडी मिलते ही कोर्ट आरोपी के खिलाफ आरोप तय करेगा, जिसके बाद नियमित ‘सेशन ट्रायल’ शुरू होगा और गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे।