मुजफ्फरपुर। जिले की नगर थाना पुलिस और अहियापुर थाना पुलिस ने एक संयुक्त कार्रवाई करते हुए सोनारपट्टी इलाके में छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने दो आभूषण दुकानदारों को हिरासत में लिया है। इन पर आरोप है कि ये पेशेवर चोरों से सस्ते दामों पर चोरी के जेवर खरीदते थे और अपनी दुकानों में उन्हें गलाकर उनका स्वरूप पूरी तरह बदल देते थे।

​कैसे चलता था पहचान मिटाने का खेल?

​अहियापुर थानाध्यक्ष रोहन कुमार के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में हुई आभूषण चोरी की कई वारदातों की जब तकनीकी और वैज्ञानिक जांच की गई, तो इन दुकानदारों की संदिग्ध भूमिका सामने आई। पकड़े गए दुकानदार इतने शातिर हैं कि वे चोरी के गहनों को तुरंत गला देते थे, जिससे असली मालिक भी अपने जेवरों की पहचान नहीं कर पाते थे। इस प्रक्रिया के बाद उन गहनों को नए आभूषणों के रूप में बाजार में खपा दिया जाता था।

​पुलिस की रडार पर पूरा गिरोह

​फिलहाल पुलिस दोनों संदिग्धों को अहियापुर थाने में रखकर कड़ी पूछताछ कर रही है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य उस पूरे सिंडिकेट का पता लगाना है जो चोरी की घटनाओं को अंजाम देने के बाद इन स्वर्णकारों के संपर्क में रहता था। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है और शहर के अन्य इलाकों में भी छापेमारी की जा सकती है।

​आगे की कार्रवाई

​नगर थाना क्षेत्र के सोनारपट्टी से हुई इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, जिससे यह पता चल सके कि अब तक कितने लाख या करोड़ के चोरी के आभूषणों को ठिकाने लगाया जा चुका है। पुलिस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इस गिरोह में शामिल अन्य मददगारों और अपराधियों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।