कुमार उत्तम/मुजफ्फरपुर। केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ देशव्यापी आह्वान पर आज मुजफ्फरपुर की सड़कों पर विभिन्न ट्रेड यूनियन संगठनों ने अपनी ताकत दिखाई, हालांकि इस विरोध प्रदर्शन का जनजीवन और सरकारी कामकाज पर कोई खास असर नहीं दिखा।
प्रमुख संगठनों की एकजुटता
ऐतिहासिक खुदीराम बोस स्मारक स्थल से एक विशाल संयुक्त जुलूस निकाला गया। इसमें इंटक (INTUC), एटक (AITUC), सीटू (CITU), ऐक्टु (AICCTU), एआईयूटीयूसी (AIUTUC) और सेवा (SEWA) सहित लगभग एक दर्जन से अधिक संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर ‘मजदूर विरोधी’ और ‘जन विरोधी’ होने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की।
प्रमुख मांगें और विरोध के स्वर
जुलूस में शामिल नेताओं ने अपनी मांगों का चार्टर पेश किया, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे शामिल थे:
लेबर कोड: चार नए लेबर कोड को तुरंत निरस्त करने की मांग।
निजीकरण पर रोक: बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई का विरोध।
विधेयक वापसी: विद्युत संशोधन विधेयक 2025 और बीज विधेयक को वापस लेने की मांग।
मनरेगा: मनरेगा अधिनियम को कमजोर करने की कोशिशों पर तत्काल रोक।
असरहीन रही बंदी की कोशिश
यह जुलूस शहर के मुख्य मार्गों—कलेक्ट्रेट परिसर, रजिस्ट्री कार्यालय, सदर अस्पताल रोड और स्टेशन रोड से गुजरा। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कार्यालयों और कामकाज को बंद कराने का प्रयास किया, लेकिन मुजफ्फरपुर के कार्यालयों में काम सुचारू रूप से चलता रहा। बाजार खुले रहे और परिवहन सेवाओं पर भी इस हड़ताल का कोई उल्लेखनीय प्रभाव देखने को नहीं मिला।
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