नालंदा। जिले के सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 की वार्षिक परीक्षा का बिगुल बज चुका है। आगामी 12 से 19 मार्च तक आयोजित होने वाली इस परीक्षा में जिले के लगभग साढ़े 3 लाख विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। जिला शिक्षा कार्यालय ने परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल नवाचार और सख्त निगरानी की रणनीति तैयार की है।
डिजिटल माध्यम से मिलेंगे प्रश्नपत्र
इस बार की परीक्षा की सबसे बड़ी विशेषता ई-शिक्षकोष पोर्टल का उपयोग है, जिसके माध्यम से कक्षा 1 से 8 तक के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। कक्षा 3 से 8 के छात्रों को बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा मुद्रित आधिकारिक उत्तरपुस्तिकाएं दी जाएंगी। जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय के अनुसार, परीक्षा दो पालियों (सुबह 10-12 और दोपहर 1-3 बजे) में संपन्न होगी।
परीक्षा का स्वरूप और कड़ाई
नियमों के तहत कक्षा 1 और 2 के बच्चों के लिए केवल मौखिक परीक्षा होगी, जबकि कक्षा 3 से 8 के लिए लिखित परीक्षा अनिवार्य है। कदाचार रोकने के लिए ‘क्रॉस-इनविजीलेशन’ व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें एक स्कूल के शिक्षक दूसरे स्कूल में ड्यूटी करेंगे। खास बात यह है कि पिछले रिकॉर्ड के आधार पर संदिग्ध छवि वाले शिक्षकों को वीक्षक कार्य से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
मूल्यांकन और परिणाम
पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु कक्षा 3 से 8 की कॉपियों की जांच संबंधित स्कूल के बजाय नजदीकी संकुल केंद्रों पर 19 से 24 मार्च के बीच होगी। परीक्षा का अंतिम परिणाम 30 मार्च को शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी (PTM) में घोषित किया जाएगा, जहां अभिभावकों को बच्चों का प्रगति पत्र सौंपा जाएगा। 12 मार्च को पर्यावरण और सामाजिक विज्ञान से शुरू होकर यह परीक्षा 19 मार्च को गणित और अंग्रेजी के साथ समाप्त होगी।
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