नालंदा। जिले में स्थित प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर में मंगलवार को मची भगदड़ ने खुशियों को मातम में बदल दिया। इस हादसे में 9 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें 8 महिलाएं शामिल हैं। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तक की बड़ी कार्रवाई की है।

​प्रशासनिक गाज: पुजारी और पुलिसकर्मी नपे

​हादसे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंदिर के 4 पुजारियों को गिरफ्तार कर लिया है। सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक को देखते हुए दीपनगर थानाध्यक्ष समेत 4 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। जांच में पाया गया कि भीड़ के दबाव का सही आकलन करने और उसे नियंत्रित करने में स्थानीय पुलिस और मंदिर प्रबंधन पूरी तरह विफल रहे।

​धार्मिक न्यास बोर्ड का सख्त रुख

​बुधवार को बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर रणवीर नंदन ने घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने प्रबंधन की खामियों को स्वीकार करते हुए कहा, यह स्पष्ट रूप से मैनेजमेंट के स्तर पर हुई बड़ी चूक है। उन्होंने घोषणा की कि भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने के लिए मंदिर का पंजीकरण और वैज्ञानिक प्रबंधन अनिवार्य किया जाएगा।

​वीडियो में कैद हुआ खौफनाक मंजर

​घटना का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में जमीन पर गिरी महिलाओं को बचाने की जद्दोजहद दिख रही है, जबकि पीछे से आ रहा भीड़ का रेला लोगों को कुचलता हुआ आगे बढ़ रहा है। चीख-पुकार के बीच लोग एक-दूसरे को ढांढस बंधाते और बांस की बैरिकेडिंग पकड़कर जान बचाने की कोशिश करते नजर आए।

​कैसे हुआ हादसा?

​चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार को मघड़ा गांव स्थित मंदिर में भारी भीड़ जुटी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार:

  • ​मंदिर परिसर की क्षमता से कई गुना अधिक लोग पहुंच गए थे।
  • ​मौके पर पुलिस या प्रशासन का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं था।
  • ​पहले दर्शन की होड़ में कतारें टूट गईं और धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
  • ​महज 6-7 मिनट के भीतर भगदड़ ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया।
  • ​इस हादसे ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के दावों की पोल खोल दी है।

शीतला मंदिर के प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष पर FIR

दीपनगर थाने की पुलिस अधिकारी मौसमी कुमारी के लिखित आवेदन पर मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत 20 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।

आरोप है कि मंदिर समिति ने मेला या भीड़ प्रबंधन की कोई सूचना पुलिस को नहीं दी थी। गर्भगृह के पास जानबूझकर अवरोध पैदा किया गया ताकि अवैध वसूली की जा सके। भीड़ को नियंत्रित करने के बजाय श्रद्धालुओं के साथ मारपीट की गई।

अब तक इस मामले में नामजद पुजारी अनुज कुमार पांडे, अवधेश कुमार मिश्रा, विवेकानंद पांडे, निरंजन कुमार पांडे को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।