BREAKING : नान घोटाला मामले में अहम खुलासा करने वाले शिवशंकर भट्ट बने सरकारी गवाह, कहा- ‘मेरी जान को खतरा, रमन सिंह, लीलाराम भोजवानी,पुन्नूलाल मोहिले हैं घोटाले के मास्टरमाइंड’

हेमंत शर्मा, रायपुर। नान घोटाला 36 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला है. मैं न्याय चाहता हूं. जो वास्तविक दोषी हैं, जिन्होंने जनता का हक मारा उन पर कार्रवाई हो. रमन सिंह, लीलाराम भोजवानी और पुन्नूलाल मोहले घोटाले के मास्टरमाइंड है. मुझे सरकारी गवाह बनने का एसआईटी ने ऑफर दिया, मैने उसे स्वीकारा उसके बाद कोर्ट में शपथपत्र दिया. यह बात नान घोटाले के मुख्य आरोपी शिवशंकर भट्ट ने कोर्ट में शपथपत्र देने के बाद पहली बार रविवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए कही.

उन्होंने कहा कि आम जनता जाने कि सच्चाई क्या है इसलिए सच सामने लाया हूं. सीएम मैडम वीणा सिंह हीं थी एक जगह उनके नाम का जिक्र है. बीजेपी कार्यालय में भी पैसा पहुंचा. साढ़े चार साल तक जेल में रहा इसलिए सच सामने नही ला सका. उन्होंने अपना जान का खतरा बताते हुए कहा कि इस संबंध में उन्होंने पुलिस अधीक्षक से भी बात की है.

भट्ट ने कहा कि मैंने राशन घोटाले को उजागर किया इसलिए नान घोटाले का ठीकरा मुझ पर फोड़ा गया. राशन घोटाले को छुपाने के लिए नान में छापा मरवाया गया. 10 लाख टन चावल का अतिरिक्त उपार्जन का दबाव डाला गया. 2014 में ऐसी क्या स्थिति बन गई कि नान पर अतिरिक्त उपार्जन का दबाव डाला गया. दबावपूर्वक हमें आदेश हुआ. शासन का आदेश था इसलिए हम मजबूर थे. सितंबर 2013 चुनाव के ठीक पहले 72 लाख राशनकार्ड बना दिया गया. रातों रात चावल सप्लाई का आदेश हमें दिया गया. हमने इस पर सवाल उठाया लेकिन हमें नौकरी से निकाल देने की धमकी दी गई.

भट्ट ने तत्कालीन मुख्यमंत्री पर डॉ. रमन सिंह पर अतिरिक्त चावल उपार्जन के लिए दबाव डालने की बात कहते हुए कहा कि साढ़े चार साल में मैंने बहुत कुछ खोया है. मैंने कोई दबाव में शपथपत्र नहीं दिया. मैं अपनी मर्जी से यहां आया हूं. सच सामने लाना बहुत जरूरी था. रमन सिंह ने मुझे आदतन अपराधी कहा है इस पर कानूनी कार्रवाई करूँगा. उन्होंने कहा कि 36000 करोड़ रुपए के घोटाले को नान घोटाला बता दिया गया जबकि उस समय राज्य का बजट उतना था ही नहीं तो नान के बजट का सवाल ही पैदा नहीं होता. 2014 में ऐसी क्या स्थिति बन गई थी कि 10 लाख टन धान जबर्दस्ती खरीदी कराई गई.

उन्होंने कहा कि सितंबर 2013 चुनाव के ठीक पहले 51 लाख के जगह पर 72 लाख राशन कार्ड बना दिए गए. गांव में एक घर पर चार दरवाजे बना कर एक परिवार के लिए 4 – 4 राशन कार्ड बना दिये गए. हम पर दबाव बनाकर जबरन ही राशन बंटवाए गए. विधान सभा चुनाव के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि 12 लाख राशन कार्ड फर्जी हैं, जबकि हमने कहा था कि 21 लाख फर्जी कार्ड हैं. निरस्त करने की बात कही गई, लेकिन आज तक कार्ड निरस्त नहीं हुए. इन फर्जी राशन कार्डों के जरिए कमाई की जाती थी.

इसके पहले उन्होंने बताया कि एक अप्रैल को नान का गठन हुआ था. नान एक छोटी सी संस्था है. नान के 120 डिपो से 12000 दुकानें संबंध हैॆ. नान का काम केवल स्टोरेज से दुकानों तक माल पहुंचाना है. इसके वितरण या रखरखाव की जिम्मेदारी नान की नहीं है. मैने योजना बनाई कि छत्तीसगढ़ में पैदा होने वाले धान को चावल बनाकर लोगों को पीडीएस के तहत उपलब्ध कराएं, चार महीने तक डॉ. रमन सिंह का ओएसडी भी रहा हूं. 16 अप्रैल 2002 से राज्य में यह स्किम चालू की गई. राज्य के गरीबों को राज्य का ही चावल मिलना शुरू हुआ.

नान में चार तरह की ऑडिट होती है, कैग की रिपोर्ट में खुलासा भी हुआ था कि नान में घाटा नहीं बल्कि मुनाफा हुआ है. उस वर्ष भी मार्कफेड को 400- 450 करोड़ दिया गया. मुझे रमन सिंह आदतन अपराधी बताते हैं तो यदि मैं आदतन अपराधी हूं तो इतने सालों तक इतने बडे पदों पर कैसे रह सकता हूं. अभी भी मामला हाई कोर्ट में पेंडिंग है, इसके बाद भी मुझे आदतन अपराधी कहते हैं. मेरे साथ फंसे हुए 11 साथी को जमानत दे दी गई लेकिन मुझे जमानत नही मिली. मैने बोलना शुरू किया इसलिए मुझे अंदर डाल दिया गया.

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