चंडीगढ़। उत्तर भारत में कुदरत ने ऐसा यू-टर्न लिया है कि लोग हैरान हैं। अप्रैल के महीने में जहां सूरज की तपिश परेशान करती थी, वहां अब ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने मौसम का मिजाज ही बदल दिया है। इस बेमौसम मार ने ट्राइसिटी (चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला) समेत पंजाब-हरियाणा के किसानों की कमर तोड़ दी है।
7 अप्रैल को टूटा 5 साल का रिकॉर्ड
मौसम विभाग की मानें तो बीते मंगलवार को ट्राइसिटी में अधिकतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 5.4 डिग्री कम है। गौरतलब है कि पिछले 5 सालों में 7 अप्रैल का दिन सबसे ठंडा रिकॉर्ड किया गया है। अप्रैल में इस तरह की ठंड और बारिश ने न केवल वैज्ञानिकों को चौंकाया है, बल्कि आम जनजीवन को भी अस्त-व्यस्त कर दिया है।
खेतों में बिछ गई सोने जैसी फसल
दरअसल, यह वक्त गेहूं की कटाई का है, लेकिन कुदरत के कहर ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। तेज हवाओं और ओलावृष्टि की वजह से कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है। जो किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में पहुंचे थे, वहां इंतजाम न होने की वजह से पीला सोना (गेहूं) भीगकर खराब हो रहा है। पंजाब के किसानों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में अप्रैल में ऐसी तबाही पहले कभी नहीं देखी।
मुआवजे पर गरमाई सियासत
चुनावी साल होने के कारण अब इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने कहा कि किसान अभी बाढ़ की मार से उबरे नहीं थे कि अब इस बारिश ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। सरकार जल्द गिरदावरी कराकर मुआवजा दे। बीजेपी ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने फसल बीमा योजना लागू नहीं की, जिससे किसानों को समय पर मदद नहीं मिल पा रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भरोसा दिलाया है कि अधिकारियों को गिरदावरी के निर्देश दे दिए गए हैं और किसानों की हर संभव मदद की जाएगी। मानें तो अगर अगले दो-तीन दिनों में धूप नहीं खिली, तो गेहूं के दाने काले पड़ सकते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक चपत लगना तय है।
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