नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के अंधेरे से निकलकर 17 बच्चों ने फैलाया उजियारा, जेईई मेन्स में सफलता हासिल कर बढ़ाया जिले का मान

कलेक्टर दीपक सोनी ने सभी बच्चों को दी बधाई

दंतेवाड़ा। जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित जिले के शासकीय आवासीय कोचिंग सेंटर दन्तेवाड़ा के सुदूर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के 63 बच्चे जेईई परीक्षा में शामिल हुए थे. जिसमें से 17 विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा मेन्स 2019-20 मे उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. कलेक्टर दीपक सोनी ने इन बच्चों को ढेर सारी बधाइयों के साथ उनका हौसला भी बढ़ाया. साथ ही उन्होने कहा कि कोचिंग सेंटर को और बेहतर बनाने की योजना भी चल रही है. इस बार कोविड-19 के कारण जेईई परीक्षा की तैयारी ऑनलाइन मोड से ज्ञानगंगा, व्हाट्सअप और वर्चुअल क्लास के माध्यम से आवासीय कोचिंग सेंटर दन्तेवाड़ा के द्वारा कराया जा रहा था.

विभिन्न शासकीय विद्यालयों के बच्चों को ऑनलाइन क्लास से जोड़ा गया था जिसमें से 17 बच्चों ने जेईई की परीक्षा क्वालीफाई किए हैं. ये सारे बच्चें सुदूर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रहने वालें हैं. जहां पर न बिजली की सुविधा है न आने-जाने की. नेटवर्क विहीन क्षेत्र में होते हुए भी अपनी लगन और दृढ़संकल्प के साथ इस परीक्षा में शामिल होकर सफलता हासिल किए. अधिकांश बच्चों के माता-पिता कृषक एवं दिहाड़ी मजदूर एवं निम्न वर्ग के हैं. शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों के प्रतिभा को निखार कर भविष्य निर्माण करने का प्रयास किया जा रहा है.

इस वर्ष जे.ई.ई. परीक्षा में शासकीय आवासीय कोचिंग सेंटर से 63 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 17 विद्यार्थियों ने क्वालिफाई किया है. अनुसूचित जनजाति वर्ग के 16 विद्यार्थी -दिलीप कुमार सोरी 87.65 प्रतिशत, महेन्द्र कुमार नाग 70.04 प्रतिशत, गणेश 63.67 प्रतिशत, अभय कुमार मण्डावी 62.73 प्रतिशत, हेमन्त कुमार आर्य 60.37 प्रतिशत, रितीक ककेम 59.04 प्रतिशत, सन्तुराम कुंजाम 56.58 प्रतिशत, बच्चूराम नेताम 55.50 प्रतिशत, आयता दुधी 55.09 प्रतिशत, श्रवण कुमार गोटा 53.38 प्रतिशत, महेश कुमार भास्कर 43.74 प्रतिशत, निखिल तेलाम 43.13 प्रतिशत, मनोज कुमार 41.85 प्रतिशत, जावा युवराज 39.21 प्रतिशत, कुमारी उपासना नेगी 49.64 प्रतिशत, कुमारी कल्याणी नेताम 58.88 प्रतिशत एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के 01 विद्यार्थी- राजीव जैन 73.90 प्रतिशत ने सफलता हासिल की। आशा करते है कि दन्तेवाड़ा से आने वाले वर्षो में और भी बच्चे इंजीनियर और डाक्टर बनेंगे.

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