पटना। जिले के बहुचर्चित NEET छात्रा रेप और मौत मामले में आरोपी हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर आज लगातार दूसरे दिन सुनवाई होगी। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए और पुलिस व CBI के विरोधाभासी बयानों पर गहरी नाराजगी जताई।

​एजेंसियों में तालमेल की कमी और लापरवाही

​पोक्सो कोर्ट में करीब ढाई घंटे चली सुनवाई के दौरान जज ने CBI को फटकार लगाते हुए पूछा कि केस हैंडओवर होने के बावजूद 20 दिनों तक एजेंसी मूकदर्शक क्यों बनी रही? कोर्ट ने मनीष की 14 फरवरी से 11 मार्च तक की कस्टडी को अवैध बताते हुए पूछा कि इस लापरवाही का हर्जाना कौन देगा? अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि मौत के दो महीने बाद भी कारण स्पष्ट नहीं है और SIT, CBI व पूर्व IO के बयानों में कोई समानता नहीं है।

​जांच पर उठे सवाल

​सुनवाई के दौरान दवाओं की स्ट्रिप को लेकर SIT घिर गई। शुरुआती जांच में 6 स्ट्रिप मिलने की बात कही गई थी, लेकिन साक्ष्य में केवल 3 ही दिखाई गईं। वहीं, मनीष रंजन ने खुद को बेगुनाह बताते हुए घटना के समय पावापुरी में होने का दावा किया, जबकि SIT और हॉस्टल संचालिका के बयानों में घटना की जानकारी मिलने के समय को लेकर विरोधाभास दिखा।

​वकीलों की दलीलें और विरोध

​स्पेशल पीपी ने मनीष को केस का ‘मास्टरमाइंड’ बताते हुए जमानत का विरोध किया। दूसरी ओर, पीड़िता के वकील एस.के. पांडेय ने गवाहों को धमकाने का ऑडियो सुनाया और आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां मामले को रफा-दफा (लिपापोती) करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि CBI ने दूसरी FIR में पोक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया? फिलहाल, सबकी नजरें आज होने वाले अदालती फैसले पर टिकी हैं।