दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) और उपराज्यपाल वीके सक्सेना(V K Saxena) के बीच टकराव एक बार फिर तेज़ हो गया है। आप के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज(Saurabh Bhardwaj) ने एलजी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर ऐसे अधिकारियों की तैनाती की, जिससे आप सरकार का कामकाज बाधित हो और सरकार “पंगु” बनकर रह जाए। सौरभ भारद्वाज ने एलजी वीके सक्सेना पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वह भगवान के प्रकोप से नहीं बच पाएंगे और उन्हें उनके कर्मों की पीड़ा झेलनी पड़ेगी। उन्होंने इस पूरे मामले के लिए बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जिम्मेदार ठहराया।

दरअसल, यह विवाद तब बढ़ा जब दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। इस कार्रवाई को लेकर आप ने सवाल उठाया है कि जिन अधिकारों को पहले उनकी सरकार से छीन लिया गया था, उनका इस्तेमाल अब बीजेपी सरकार कैसे कर रही है। आप नेता का कहना है कि जब उनकी सरकार के पास ये अधिकार थे, तब इन्हें असंवैधानिक बताया गया, लेकिन अब वही शक्तियां बिना किसी आपत्ति के इस्तेमाल की जा रही हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर हमला बताया।

सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर ‘ईश्वर से मेरी प्रार्थना’ शीर्षक से एक पोस्ट साझा कर केंद्र सरकार, एलजी और बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने लिखा कि पिछले दस वर्षों से दिल्ली की चुनी हुई AAP सरकार को जानबूझकर पंगु बना दिया गया, ताकि शासन व्यवस्था सुचारू रूप से न चल सके। सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि एक निर्वाचित राज्य सरकार की बुनियादी और संवैधानिक शक्तियां छीनकर मोदी सरकार ने गवर्नेंस को विकास की बजाय संघर्ष का मैदान बना दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी और केंद्र सरकार बार-बार यह तर्क देती रही हैं कि चूंकि दिल्ली देश की राजधानी है, इसलिए अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की शक्ति राज्य सरकार को नहीं दी जा सकती।

आप नेता ने आगे कहा कि इसी तर्क के सहारे चुनी हुई सरकार के प्रतिनिधियों के लिए भ्रष्ट या लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना लगभग असंभव बना दिया गया। उनका कहना है कि इससे न केवल प्रशासनिक जवाबदेही खत्म हुई, बल्कि जनता से जुड़े काम भी बुरी तरह प्रभावित हुए।

‘सुप्रीम कोर्ट ने अधिकार लौटाए तो कानून बनाकर छीना’

भारद्वाज ने आगे कहा कि मई 2023 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने न्यायपूर्ण तरीके से ये प्रशासनिक शक्तियां दिल्ली सरकार को वापस लौटा दी थीं, लेकिन इसके तुरंत बाद केंद्र सरकार ने एक अनैतिक और असंवैधानिक कानून लाकर उन्हें फिर से छीन लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम के जरिए मतदाताओं की आवाज को दबाने का काम किया गया।

आप नेता ने सवाल उठाया कि जब वही कानून आज भी लागू है, जिसके तहत दिल्ली सरकार से अधिकार छीने गए थे, तो आज उसी कानून के रहते एक मंत्री अधिकारियों का ट्रांसफर और सस्पेंशन कैसे कर सकता है? भारद्वाज ने इसे दोहरे मापदंड करार देते हुए कहा कि जब आप सरकार ने इन शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहा, तब उसे रोका गया, लेकिन अब बीजेपी सरकार उन्हीं अधिकारों का प्रयोग बिना किसी बाधा के कर रही है।

‘भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को संरक्षण’

भारद्वाज ने आरोप लगाया कि एलजी ने सिस्टेमैटिक तरीके से अकुशल और लापरवाह अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों में तैनात किया। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार और खुलेआम अनुशासनहीनता की अनगिनत शिकायतों के बावजूद इन अधिकारियों को एलजी का संरक्षण मिला, जिसके चलते वे लंबे समय तक संवेदनशील पदों पर बने रहे।

आप नेता ने इसे “क्रूर विडंबना” करार देते हुए कहा कि एक तरफ मंत्रियों को एक चपरासी तक का तबादला करने की अनुमति नहीं दी गई, वहीं दूसरी ओर उन्हीं मंत्रियों से हर दिन प्रशासनिक डिलीवरी और नतीजों को लेकर सवाल पूछे जाते रहे। उन्होंने कहा कि जब चुनी हुई सरकार के हाथ-पैर बांध दिए जाएं, तो उससे जवाबदेही की उम्मीद करना सरासर अन्याय है।

जानबूझकर ऐसी बाधाएं पैदा कीं जिससे गरीबों को कष्ट: भारद्वाज

आप नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यह पूरे घटनाक्रम में उनके “असली चेहरे” और गवर्नेंस के तरीके को उजागर करता है। भारद्वाज ने कहा, “यह ऐसे नेता को सामने लाता है जो राजनीतिक लाभ के लिए अपने ही देश के लोगों को दंडित करने के लिए तैयार है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रशासन ने जानबूझकर ऐसी बाधाएं खड़ी कीं, जिनकी वजह से दिल्ली के लाखों गरीब और कमजोर निवासियों को भारी कष्ट झेलना पड़ा। भारद्वाज के मुताबिक, मुख्य सचिव नरेश कुमार और स्वास्थ्य सचिव एस.बी. दीपक कुमार जैसे अधिकारियों की कार्यप्रणाली जो एलजी वीके सक्सेना के संरक्षण में रही ने सबसे कमजोर वर्ग के लोगों के लिए बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं का गला घोंट दिया।

आप नेता ने कहा कि हालात ऐसे बना दिए गए कि कैंसर के मरीजों और डायलिसिस पर निर्भर लोगों तक को नहीं बख्शा गया। उन्होंने इस पूरे रवैये को पूरी तरह संवेदनहीन और निर्दयी करार देते हुए कहा कि यह शासन नहीं, बल्कि जनता के खिलाफ सजा देने जैसा है।

भारद्वाज ने कहा- भगवान के प्रकोप का सामना करना पड़े

भारद्वाज ने अपने बयान में एलजी और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को लेकर बेहद कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने लिखा कि वह ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि गरीबों की पीड़ा के लिए जिम्मेदार लोगों को उसी का फल मिले। आप नेता ने पोस्ट में कहा, “मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि गरीबों की इस पीड़ा को पैदा करने के लिए जिम्मेदार सभी लोग एलजी दिल्ली, नरेश कुमार, एस.बी. दीपक कुमार और अन्य भगवान के प्रकोप का सामना करें और उन्हें उनकी इस क्रूरता के लिए वैसी ही पीड़ा मिले।”

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