यमुना एक्सप्रेसवे के पास करीब 4,000 हेक्टेयर भूमि में हाथरस अर्बन सेंटर, यानी नया हाथरस विकसित करने के लिए मास्टर प्लान-2041 तैयार किया जाएगा। इसके लिए एक कंपनी का चयन कर लिया गया है, जो अगले नौ महीनों में यह मास्टर प्लान तैयार करेगी। यमुना प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि हाथरस अर्बन सेंटर के लिए जारी आरएफपी के तहत तकनीकी बोली में तीन कंपनियां योग्य पाई गई थीं। इनमें तेलंगाना की आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट लिमिटेड, गुरुड़ा यूएवी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड और एलईए एसोसिएट्स साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

हाल ही में वित्तीय बोली खोली गई, जिसमें सबसे कम 1.24 करोड़ रुपये की बोली लगाने वाली आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट लिमिटेड का चयन किया गया। यह कंपनी मास्टर प्लान-2041 के तहत हाथरस के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए अगले नौ महीनों में 20 वर्षों की विकास योजना तैयार करेगी।

मास्टर प्लान मास्टर प्लान-2041 को यूआरडीपीएफआई गाइडलाइंस 2014, उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976, और राज्य तथा केंद्र सरकार के अन्य प्रासंगिक नियमों के अनुसार तैयार किया जाएगा। यह योजना जीआईएस (GIS) तकनीक पर आधारित होगी और इसमें औद्योगिक विकास, जनसंख्या का अनुमान, बुनियादी ढांचा, प्राकृतिक संसाधन और पर्यावरण संतुलन जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।

औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र

इतिहास में हाथरस ब्रिटिश काल के दौरान एक प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र रहा है। हालांकि, समय के साथ बुनियादी ढांचा और सुविधाओं की कमी के कारण इसका महत्व कम हो गया। एक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में हाथरस जिले में एमएसएमई (लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योग) और कुटीर उद्योग मौजूद हैं। जिले में लगभग 10,293 उद्योग पंजीकृत हैं, जिनमें अधिकांश उद्योग क्लस्टर (समूह) के रूप में विकसित हैं।

हाथरस जिले में मौजूदा उद्योग क्लस्टरों की स्थिति इस प्रकार है:

कांच की चूडियां निर्माण: 3,300

घुंघरू निर्माण: 3,124

होजरी एवं कपड़ा उद्योग: 1,600

हस्तशिल्प उद्योग: 850

कोल्ड स्टोरेज: 140

धातु शिल्प: 85

रंग और डाई उद्योग: 40

दाल मिल: 35

हींग निर्माण: 32

आयुर्वेदिक दवा निर्माण: 30

अचार उद्योग: 16

बोटलिंग प्लांट और डेयरी: 3

संपर्क मार्ग बेहतर

प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में हाथरस के 358 गांव शामिल हैं। वर्तमान में हाथरस का सड़क संपर्क अलीगढ़ और आगरा की तुलना में बेहतर है। नए शहर का एनएच-93 और यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए एसएच-33 से कनेक्शन है। इसके अलावा, हाथरस (जंक्शन) पर दो रेल लाइनें मिलती हैं।

हालांकि, कुछ कमजोरियां भी हैं:

आंतरिक सड़कों की कमी, पर्याप्त बिजली और जल आपूर्ति नहीं, सीवरेज व्यवस्था अधूरी, स्वास्थ्य सेवाओं की अपर्याप्तता, मनोरंजन और सामाजिक सुविधाओं का अभाव, ये कमियां नए हाथरस के विकास में ध्यान देने योग्य प्रमुख क्षेत्र हैं।

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