दिल्ली में बिजली सब्सिडी योजना ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। दिसंबर 2025 में राजधानी के 93 प्रतिशत से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ उठाया। इनमें से करीब 73 प्रतिशत परिवारों का बिजली बिल पूरी तरह शून्य (जीरो) रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक सर्दियों के मौसम में बिजली की खपत कम रहने के कारण अधिक संख्या में उपभोक्ता सब्सिडी के दायरे में आए। हीटर, एसी और कूलर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल घटने से औसत खपत सीमित रही, जिससे ज्यादा परिवारों को पूरा सब्सिडी लाभ मिल सका।
दिल्ली सरकार का कहना है कि यह आंकड़ा बताता है कि बिजली सब्सिडी योजना आम लोगों, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। सरकार का दावा है कि इस योजना से घरेलू बजट पर बोझ कम हुआ है और ऊर्जा की संतुलित खपत को भी बढ़ावा मिला है।
2019 से मिल रही फ्री बिजली
दिल्ली में 2019 में शुरू हुई बिजली सब्सिडी योजना के तहत उपभोक्ताओं को खपत के आधार पर राहत दी जाती है। योजना के अनुसार 200 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को पूरी तरह मुफ्त बिजली मिलती है। 201 से 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वालों को 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ दिया जाता है। 400 यूनिट से अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को पूरा टैरिफ चुकाना होता है।
3 साल में लगातार बढ़ी डिमांड
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में घरेलू बिजली कनेक्शनों की संख्या बढ़कर 63 लाख हो गई है और सब्सिडी लेने वाले उपभोक्ताओं की संख्या भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। आंकड़ों के अनुसार 2023 में औसतन 75–76 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली सब्सिडी का लाभ मिला। 2024 में यह बढ़कर 78–79 प्रतिशत तक पहुंच गया। 2025 में 79–80 प्रतिशत घरों को साल के दौरान किसी न किसी समय सब्सिडी मिली। खास बात यह है कि 200 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले परिवार इस योजना की रीढ़ बने हुए हैं। 2025 में ऐसे परिवारों की औसत संख्या 31–32 लाख रही, जो पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा है। यह दर्शाता है कि बिजली सब्सिडी योजना का सबसे बड़ा लाभ कम और मध्यम खपत वाले उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है।
मौसम का असर साफ दिखा
सब्सिडी की पहुंच मौसम पर काफी निर्भर करती है। ठंड के महीनों में, जैसे दिसंबर, लाभार्थियों की संख्या 58 लाख से अधिक हो गई और योजना की कवरेज 93 प्रतिशत तक पहुंची। गर्मियों में, एसी और अन्य उपकरणों के कारण खपत बढ़ने पर लाभार्थियों की संख्या कम हो जाती है। फिर भी 2025 की गर्मियों में पिछले दो सालों की तुलना में लगभग 42.5 लाख परिवारों को सब्सिडी मिली, जो बचत और स्मार्ट इस्तेमाल की बढ़ती जागरूकता का संकेत है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 200 यूनिट तक खपत करने वाले परिवार योजना की रीढ़ हैं, जिससे बेसिक खपत स्थिर रहती है। दूसरे अधिकारी ने कहा कि 2025 में लाभार्थियों की संख्या में स्थिरता इस योजना की सबसे बड़ी खासियत रही।
सब्सिडी पर बढ़ता खर्च
दिल्ली में बिजली सब्सिडी योजना की बढ़ती लोकप्रियता के चलते खर्च रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। अनुमान है कि 2025-26 में इस योजना पर 4,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे। इस साल बजट में पहले ही 3,849 करोड़ रुपये रखे गए थे, लेकिन अतिरिक्त 361 करोड़ रुपये की मांग उठाई गई है। यह पिछले साल से 250 करोड़ रुपये ज्यादा है।
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