दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल(Arvind Kejriwal) के खिलाफ आरोप तय करने की सुनवाई को 7 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया है। यह मामला वर्षों से अदालत में लंबित है, जिसमें जांच एजेंसियां सबूत पेश कर रही हैं और बचाव पक्ष उन सबूतों को चुनौती दे रहा है।

केजरीवाल की टीम का दावा

केजरीवाल के वकीलों ने कोर्ट में जोरदार दलील दी कि आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उनका कहना है कि चार्जशीट में कोई ठोस सबूत नहीं है कि केजरीवाल ने कथित ‘साउथ लॉबी’ (दक्षिण भारत से जुड़े शराब कारोबारियों) से रिश्वत मांगी या ली। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि जांच एजेंसी CBI के पास ऐसे पुख्ता प्रमाण नहीं हैं जो केजरीवाल को सीधे तौर पर इस घोटाले से जोड़ सकें।

सिसोदिया के खिलाफ आरोपों पर बहस खत्म

पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ आरोप तय करने पर बहस पूरा हो चुका है, और कोर्ट अब उनके मामले में फैसला सुना सकती है। सिसोदिया इस मामले में सबसे पहले बड़े नाम थे जिन्हें गिरफ्तार किया गया था, और अब उनकी स्थिति पर सबकी नज़रें टिकी हुई हैं।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली सरकार की 2021-22 की नई शराब नीति में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि नीति में बदलाव कर कुछ शराब लाइसेंसधारियों को फायदा पहुंचाया गया और बदले में राजनीतिक फंडिंग हुई। इस संबंध में सीबीआई ने भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया, जबकि ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चलाया। आरोपों के अनुसार, अरविंद केजरीवाल इस कथित ‘साजिश’ के केंद्र में थे, लेकिन बचाव पक्ष इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताता है। अब सभी की निगाहें 7 फरवरी पर टिकी हैं, जब कोर्ट यह फैसला सुना सकती है कि केजरीवाल के खिलाफ आरोप तय होंगे या नहीं।

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