New Waqf Act: वक्फ संशोधन विधेयक- 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब ये कानून बन गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी से पहले वक्फ बिल दोनों सदनों से पास हो गया था। सरकार ने एक अधिसूचना में कहा, ‘संसद से पारित वक्फ संशोधन अधिनियम को 5 अप्रैल, 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है।

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अब नए कानून को लागू करने की तारीख को लेकर केंद्र सरकार अलग से एक नोटिफिकेशन जारी करेगी। यह बिल (अब कानून) पर 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा में 12-12 घंटे की चर्चा के बाद पास हुआ था।

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इधर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने शनिवार (5 अप्रैल 2025) को इस बिल के विरोध में देशव्यापी आंदोलन करने की चेतावनी दी है। एआईएमपीएलबी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, विजयवाड़ा, मलप्पुरम, पटना, रांची, मलेरकोटला और लखनऊ में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘सत्ता पक्ष ने बहुमत का दुरुपयोग किया है और विधेयक को जबरन थोपा गया है।

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संसद को दोनों सदनों में कितने वोट पड़े?

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस कानून पर अपनी चिंता जताने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से तत्काल मुलाकात का समय भी मांगा था। लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल के पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े थे। वहीं, राज्यसभा में बिल के पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 वोट पड़े थे। राज्यसभा में विपक्ष की ओर से लाए गए तमाम संशोधन प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गए थे।

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सुप्रीम कोर्ट में 4 याचिकाएं दायर

नए कानून को लेकर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी और AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने अलग-अलग याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। वहीं, शनिवार को इस कानून के प्रावधानों को लागू करने या उसे कार्यान्वित करने पर रोक लगाए जाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में  2 और याचिकाएं दाखिल की गई। एक याचिका दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक और वक्फ में घोटाले और गबन के आरोपी अमानतुल्लाह खान ने दाखिल की है, जबकि दूसरी याचिका एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन इन द मैटर्स ऑफ सिविल राइट्स नामक संस्था ने दाखिल की। इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) विधेयक की वैधता को चुनौती देते हुए कहा कि यह संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है।

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जावेद की याचिका में आरोप लगाया गया कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों और उनके प्रबंधन पर मनमाने प्रतिबंध लगाता है, जिससे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता कमजोर होती है। अधिवक्ता अनस तनवीर के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि यह “ऐसे प्रतिबंध लगाकर मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव करता है जो अन्य धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन में मौजूद नहीं हैं।

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बिहार के किशनगंज से लोकसभा सांसद जावेद इस विधेयक पर गठित संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य थे और उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि यह विधेयक “किसी व्यक्ति के धार्मिक आचरण की अवधि के आधार पर वक्फ के निर्माण पर प्रतिबंध लगाता है। अपनी अलग याचिका में ओवैसी ने कहा कि विधेयक ने वक्फों और हिंदू, जैन और सिख धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्तों को दी जाने वाली विभिन्न सुरक्षा को छीन लिया है।

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