राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर से लेकर देशभर के खाटू श्याम मंदिरों में भक्त हर एकादशी तिथि पर निशान ध्वज लेकर लंबी यात्रा करते हुए पहुंचते हैं. श्याम भक्तों के बीच यह परंपरा बेहद श्रद्धा और आस्था से जुड़ी मानी जाती है.

हिंदू धर्म में ध्वज को विजय का प्रतीक माना गया है. खाटू श्याम जी को निशान (ध्वज) अर्पित करने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है. आज भी बाबा श्याम को निशान चढ़ाया जाता है. निशान को झंडा और ध्वज भी कहा जाता है. इसे बाबा श्याम द्वारा दिए गए बलिदान और दान का प्रतीक माना जाता है.

पौराणिक कथा

मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर धर्म की जीत के लिए खाटू श्याम ने अपना शीश समर्पित कर दिया था और युद्ध की विजय का श्रेय भगवान श्रीकृष्ण को दिया था. इसी कारण से निशान को उनके बलिदान और समर्पण का प्रतीक माना जाता है.

निशान अर्पित करने का नियम

बाबा श्याम को जो निशान अर्पित किया जाता है, वह मुख्य रूप से केसरिया, नारंगी और लाल रंग का होता है. इन ध्वजों पर भगवान श्रीकृष्ण और बाबा श्याम की तस्वीरें तथा मोर पंख लगाए जाते हैं. मान्यता है कि इस निशान को बाबा श्याम को अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कई श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर भी निशान चढ़ाते हैं. निशान को खाटू श्याम बाबा के बलिदान और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है और इसका गहरा आध्यात्मिक महत्व बताया गया है.