पटना। बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ता दिख रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार इन दिनों जेडीयू (JDU) संगठन में पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं। हाल ही में निशांत कुमार पटना स्थित जदयू प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां पार्टी के विधायकों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने पिता के दिखाए रास्तों और मार्गदर्शन पर चलकर पार्टी को मजबूती प्रदान करेंगे।
विधायकों और जिला अध्यक्षों के साथ अहम बैठक
निशांत कुमार ने पार्टी कार्यालय में सारण प्रमंडल के अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण सांगठनिक बैठक की। इस बैठक में चेतन आनंद, रुहेल रंजन और ऋतुराज कुमार जैसे युवा विधायकों की मौजूदगी ने भविष्य की राजनीति के संकेत दिए। साथ ही, मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले एमएलसी संजय गांधी भी इस दौरान उपस्थित रहे। निशांत ने कहा कि उनकी प्राथमिकता वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं को एक साथ लेकर चलने की है।
नीतीश कुमार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर दी बधाई
नीतीश कुमार के एक बार फिर से जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर निशांत ने हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता का नेतृत्व पार्टी के लिए हमेशा प्रेरणादायक रहा है। जब पत्रकारों ने उनसे भावी मुख्यमंत्री के नारों पर सवाल पूछा, तो निशांत ने बड़ी कुशलता से इसे टाल दिया, लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच बिहार का सीएम कैसा हो, निशांत कुमार जैसा हो के नारे गूंजते रहे।
सियासी सफर का आगाज और भावुक पल
निशांत कुमार ने आधिकारिक तौर पर 8 मार्च को जेडीयू की सदस्यता ग्रहण की थी। उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सदस्यता दिलाई, जिसमें ललन सिंह सहित कई दिग्गज नेता मौजूद थे। सदस्यता लेने के बाद निशांत अपनी दिवंगत माता मंजू सिन्हा की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने कंकड़बाग पहुंचे। वहां वे थोड़े भावुक नजर आए और कहा, आज मां की बहुत याद आ रही है, उनका आशीर्वाद सदा मुझ पर बना रहे।
भविष्य की योजना: 38 जिलों की यात्रा
पार्टी में शामिल होने के बाद से ही निशांत एक्शन मोड में हैं। उन्होंने घोषणा की है कि वे जल्द ही बिहार के सभी 38 जिलों का दौरा करेंगे ताकि जनभावनाओं को समझ सकें। सफेद कुर्ते और सादगी भरे अंदाज में नजर आने वाले निशांत ने युवाओं से अपील की है कि वे विकास की इस यात्रा में शामिल हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राज्यसभा जाएंगे या नहीं, इसका फैसला उनके पिता और पार्टी करेगी, लेकिन वे एक निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में मेहनत करना जारी रखेंगे।
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