कुंदन कुमार/ पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर बुधवार शाम इफ्तार पार्टी का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक सौहार्द का प्रतीक बना, बल्कि इसमें बदलते राजनीतिक और पारिवारिक प्रोटोकॉल की झलक भी साफ दिखाई दी। मुख्यमंत्री आवास के गेट नंबर-13 पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच केवल पास धारक अतिथियों को ही प्रवेश दिया गया।

​पहली पंक्ति में निशांत, पीछे बैठे नीतीश

​इस साल की इफ्तार पार्टी में सबसे चौंकाने वाला बदलाव बैठने की व्यवस्था में दिखा। आमतौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्य स्थान पर बैठते थे, लेकिन इस बार उनके पुत्र निशांत कुमार टोपी और गमछा पहनकर रोजेदारों के बीच पहली पंक्ति में नजर आए। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विनम्रता के साथ पीछे की कतार में हाथ जोड़कर बैठे दिखे। निशांत की इस मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में उत्तराधिकार और भविष्य की सक्रियता को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।

​सत्ता के दिग्गजों की मौजूदगी

​कार्यक्रम की शुरुआत नमाज के साथ हुई, जिसके बाद इफ्तार किया गया। इस अवसर पर बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनके साथ मंत्री जमा खान, विजय चौधरी, जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और कई विधायक शामिल हुए। मुख्यमंत्री अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ से लौटने के तुरंत बाद इस आयोजन का हिस्सा बने।

​विजय चौधरी का बयान

​मंत्री विजय चौधरी ने इस दौरान मुख्यमंत्री के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि नीतीश कुमार का अल्पसंख्यकों के प्रति संकल्प अटूट है। उन्होंने दावा किया कि देश के किसी भी राज्य में अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए इतना काम नहीं हुआ है जितना बिहार में हुआ। जब उनसे निशांत की मौजूदगी और भावुक क्षणों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, राजनीति भावनाओं से नहीं, बल्कि अपनी गतिविधियों से चलती है।
​यह आयोजन मंगलवार को हज भवन में हुई संक्षिप्त इफ्तार के उलट था, जहां मुख्यमंत्री मात्र दो मिनट रुके थे। बुधवार को अपने आवास पर नीतीश कुमार पूरे समय मौजूद रहे और सभी का अभिवादन स्वीकार किया।