पटना। बिहार की राजनीति के एक बड़े युग का अंत होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब केंद्र की राजनीति में सक्रिय होंगे और जल्द ही बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा।
​शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए दिल्ली पहुंचे नीतीश कुमार ने हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत के दौरान अपने इरादे साफ कर दिए। उन्होंने कहा, हम तो कल ज्वाइन कर लेंगे। हमने तय कर लिया है। वहां (बिहार) का छोड़कर अब यहीं (दिल्ली) रहेंगे और यहीं का सारा काम करेंगे। नीतीश कुमार के इस बयान ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है जिनमें उनके भविष्य की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।

​15 अप्रैल तक नए मुख्यमंत्री का चयन

​नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के साथ ही बिहार में नए शासन की पटकथा लिख दी गई है। उन्होंने संकेत दिया कि तीन-चार दिनों के बाद जब वे वापस पटना लौटेंगे, तब मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप देंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके जाने के बाद बिहार की कमान ‘नए लोगों’ के हाथ में होगी। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 14 अप्रैल तक नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगा देगा, जिससे 15 अप्रैल तक बिहार को नया नेतृत्व मिल जाएगा।

​संजय झा और विजय चौधरी का रुख

​हवाई अड्डे पर जब नीतीश कुमार मीडिया को संबोधित कर रहे थे, तब उनके साथ जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी मौजूद थे। नीतीश ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने बिहार के लिए बहुत काम किया है और अब वे दिल्ली में रहकर सेवा करना चाहते हैं। दूसरी ओर, बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने पुष्टि की कि नीतीश कुमार जल्द ही पद छोड़ेंगे, लेकिन आने वाली सरकार ‘नीतीश मॉडल’ पर ही काम करेगी। उनके अनुसार, पिछले 20 वर्षों का विकास मॉडल ही भविष्य का आधार बनेगा।

​राज्यसभा की सदस्यता और नया सफर

​नीतीश कुमार ने 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद 16 मार्च को उन्हें निर्विरोध राज्यसभा के लिए चुना गया। शुक्रवार को वे राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन के कक्ष में शपथ ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही बिहार में करीब दो दशक से चला आ रहा नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री काल समाप्त हो जाएगा और राज्य में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत होगी।