नोएडा. सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. मृत युवक अपनी जान बचाने के लिए दो घंटे तक पुलिस और सिस्टम से मदद की गुहार लगाता रहा लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की. पुलिस प्रशासन के सारे हाईटेक हथियार धरे के धरे रह गए और एक पिता के सामने देखते ही देखते उसका बेटा काल के गाल में समा गया. इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था. आज चौथे दिन भी टीम की जांच जारी है.
SIT से जुड़े सूत्रों की मानें तो टीम ने पहले 5, उसके बाद 7 बिंदु पर जवाब मांगा. ये सवाल नोएडा प्राधिकरण के करीब पांच विभागों से किए गए. करीब 5 विभागों से कुल 12 सवाल किए गए. बताया जा रहा है कि प्राधिकरण के अफसरों ने इस मामले में संज्ञान नहीं लिया था. ट्रक 31 दिसम्बर को हादसे का शिकार हुआ था. SIT को सेक्टर-150 की शिकायतों की जानकारी मिली थी. SIT ने आज फिर से मामले की जांच की कड़ी में प्राधिकरण के अफसरों से सवाल किए. वहीं जवाब की नोटिंग की.
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क्या है पूरा मामला
बता दें कि ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में एक कंस्ट्रक्शन साइट पर पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट कि माने तो युवराज की मौत दम घुटने के कारण हुई. उनके फेफड़ों में काफी मात्रा में पानी भरा हुआ था. वहीं मृतक के पिता ने बताया कि वहां मौजूद एथारिटी के कर्मचारियों के पास रस्सी के अलावा कुछ नहीं था, जो रस्सी नीचे फेंक रहे थे वह वहां पहुंच नहीं पा रही थी. वहीं, बेटा बार बार कह रहा था बहुत नीचे जा रही है कार अब भी बचा लीजिए. अगर समय से बोट आ जाती तो बेटे की जान बच जाती, बेटा 2 घंटे तक जान बचाने की गुहार लगाता रहा.
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