रायपुर। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली छत्तीसगढ़ संचार क्रांति योजना (स्काई) के तहत राज्य में ढाई साल के भीतर 55 लाख 60 हजार लोगों को निःशुल्क मोबाइल फोन देने के लिए एक हजार 230 करोड़ रूपए की कार्ययोजना तैयार की गई है. इसमें से 50 लाख 80 हजार हितग्राहियों को चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 और अगले वित्तीय वर्ष 2018-19 में मोबाइल फोन बांटने का लक्ष्य है. इनमें 40 हजार 10 हजार ग्रामीण हितग्राही और पांच लाख 60 हजार शहरी गरीबों सहित तकनीकी और गैर तकनीकी कॉलेजों के पांच लाख 10 हजार विद्यार्थी शामिल होंगे. प्रथम चरण में इस पर 1128 करोड़ रूपए की लागत आने का अनुमान है. शेष चार लाख 80 हजार परिवारों को वित्तीय वर्ष 2019-20 में मोबाइल फोन दिए जाएंगे.

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की घोषणा के अनुरूप राज्य सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने योजना के क्रियान्वयन की तैयारी शुरू कर दी है. विभाग द्वारा यहां मंत्रालय (महानदी भवन) से छत्तीसगढ़ संचार क्रांति योजना के लिए अधिसूचना जारी कर दी है. विभागीय अधिकारियों ने बुधवार को  बताया कि योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिक की संस्था ’चिप्स’ के माध्यम से किया जाएगा. अधिसूचना मे कहा गया है कि इस योजना के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार, शहरी गरीब परिवार और कॉलेजों के युवाओं को निःशुल्क मोबाइल फोन दिए जाएंगे. परिवार में महिला होने की स्थिति में महिला को ही यह फोन दिया जाएगा. योजना पर अमल दो चरणों में किया जाएगा.

अधिकारियों ने बताया कि प्रथम चरण में चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 और अगले वित्तीय वर्ष 2018-19 में एक हजार से ज्यादा आबादी वाले सभी गांवों और एक हजार से कम जनसंख्या वाले ऐसे सभी गांवों को शामिल किया जाएगा, जहां वर्तमान में मोबाइल फोन का कव्हरेज पूर्ण या आंशिक रूप से उपलब्ध है, वहां के ग्रामीण परिवारों, शहरी गरीब परिवारों और कॉलेजों के युवाओं को स्मार्ट फोन दिए जाएंगे. योजना के दूसरे चरण में वर्ष 2019-20 में एक हजार से कम जनसंख्या वाले ऐसे गांवों को शामिल किया जाएगा, जहां मोबाइल फोन कव्हरेज उपलब्ध नहीं है. इन गांवों के सभी परिवारों को स्मार्ट फोन दिए जाएंगे. योजना में प्रत्येक ग्रामीण परिवार की महिला मुखिया और प्रत्येक शहरी गरीब परिवार की महिला मुखिया तथा कॉलेजों के युवाओं को इस योजना में शामिल किया जाएगा. दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा स्वयं के खर्च पर नेटवर्क विस्तार करने का प्रयास किया जाएगा. जिस हितग्राही को स्मार्ट फोन दिया जाएगा, उसका फोन नम्बर पूर्व आवंटित होगा, यह आधार और बैंक खाते से भी जुड़ा होगा, इससे हितग्राही को अपना फोन निरंतर रखने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. संचार क्रांति योजना से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल फोन मरम्मत और रख-रखाव के कार्यों में युवाओं को स्व-रोजगार भी मिल सकेगा.

अधिसूचना के अनुसार राज्य में मोबाइल कनेक्टिविटी से अछूते रह गए इलाकों को संचार क्रांति के इस नेटवर्क से जोड़ना, स्मार्ट फोन के उपयोग के जरिए प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना, जेण्डर सशक्तिकरण, जनधन, आधार और स्मार्ट फोन के जरिए सरकारी योजनाओं के हितग्राहियों को व्यापक स्तर पर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रक्रिया से उनकी राशि सीधे उनके खाते में भेजना डिजिटल भुगतान और पहुंच के जरिए बैंकिंग सेवाओं का विस्तार, सामान्य सेवा केन्द्रों के जरिए आम जनता को शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है. इसके अलावा स्मार्ट फोन के जरिए शासकीय और निजी सेवाओं का लाभ नागरिक आसानी से ले सकें और शासन में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहन मिल सके, यह भी इस योजना का उद्देश्य है.

योजना के तहत चिप्स अर्थात छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी को क्रियान्वयन एजेंसी का दायित्व सौंपा जाएगा. मोबाइल फोन का वितरण जिला कलेक्टर द्वारा राशन दुकानों, ग्राम पंचायत भवनों या सुविधानुसार अन्य किसी निश्चित स्थान से किया जा सकेगा. वितरण के लिए योजना जिला कलेक्टरों द्वारा बनाई जाएगी. हितग्राहियों का चयन ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा, शहरी क्षेत्रों में नगरीय प्रशासन और विकास विभाग द्वारा और कॉलेजों में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा किया जाएगा. योजना के तहत मोबाइल टावरों की स्थापना के लिए राजस्व विभाग द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को सरकारी जमीन निःशुल्क दी जाएगी. इसके अलावा टॉवर लगाने के लिए सरकारी भवनों की छतों का भी उपयोग किया जा सकेगा, जिसकी अनुमति संबंधित विभागों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को दी जाएगी.

अधिसूचना के अनुसार राज्य सरकार ने इस योजना के प्रभावी  क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है. समिति में पंचायत और ग्रामीण विकास, वाणिज्य और उद्योग तथा उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव तथा खाद्य और नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव सदस्य बनाए गए हैं. चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इस समिति के सदस्य सचिव होंगे. समिति के अध्यक्ष की अनुमति से सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी. समिति को योजना के क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा – निर्देश जारी करने, वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित करने, चिन्हित हितग्राहियों के अलावा किसी अन्य वर्ग को भी योजना में शामिल करने हितग्राहियों के चयन के लिए योग्यता और वितरण योजना में आवश्यक होने पर संशोधन करने, योजना की प्रगति की समीक्षा करने और अंतर्विभागीय समन्वय करने का अधिकार और दायित्व सौंपा गया है.