मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना नदी की सेहत सुधारने के लिए बेहद सख्त कदम उठाया है. उन्होंने सचिवालय में हुई हाईलेवल बैठक में अधिकारियों को मिशन मोड में काम करने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री का मानना है कि यमुना केवल एक नदी नहीं बल्कि दिल्ली की असली जीवनरेखा है.सरकार ने साल 2028 तक यमुना को पूरी तरह साफ करने का एक विस्तृत खाका तैयार किया है. इसके साथ ही पहली बार नालों की निगरानी के लिए आधुनिक ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से आने वाले दूषित पानी को रोकने के लिए भी विशेष रणनीति बनाई गई है. सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने भी इस बैठक में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई है.
यमुना की सफाई के मामले में दिल्ली के पड़ोसी राज्यों की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण है. नजफगढ़ नाले में हरियाणा के छह नालों का गंदा पानी आकर मिलता है जो कुल प्रदूषण का 33 प्रतिशत है. इसी तरह शाहदरा नाले में उत्तर प्रदेश के चार बड़े नाले करीब 40 प्रतिशत दूषित पानी छोड़ते हैं. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इस मसले पर जल्द ही हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बातचीत करेंगी.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना को 2028 तक पूरी तरह साफ करने का संकल्प लिया है. दिल्ली सरकार सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1500 एमजीडी करने जा रही है. अब नालों की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल होगा. पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ भी समन्वय बनाया जाएगा. अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन का काम तेज किया गया है. इससे यमुना में गिरने वाला गंदा पानी पूरी तरह रुकेगा.
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जब तक हर घर सीवर लाइन से नहीं जुड़ेगा तब तक यमुना साफ नहीं होगी. दिल्ली की 1799 अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर नेटवर्क बिछाने का काम तेजी से शुरू किया गया है. यह काम दिसंबर 2026 से लेकर दिसंबर 2028 तक अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा. वर्तमान में 675 जेजे क्लस्टर्स में से 574 में काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है. बाकी बचे क्लस्टर्स के लिए सिंगल पॉइंट कलेक्शन की नई व्यवस्था लागू की जा रही है. इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि घरों का गंदा पानी अब सीधे नदी में नहीं जाएगा. इससे यमुना में होने वाली बदबू और जानलेवा प्रदूषण में भारी कमी आने की उम्मीद है. मुख्यमंत्री खुद इस पूरे प्रोजेक्ट की प्रगति पर अपनी कड़ी नजर रख रही हैं.
यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए पहली बार आधुनिक निगरानी तंत्र तैयार किया गया है. डीपीसीसी और सीपीसीबी की टीमें हर महीने 47 महत्वपूर्ण जगहों पर पानी की शुद्धता की जांच कर रही हैं. नजफगढ़ और शाहदरा जैसे बड़े नालों से जुड़े छोटे नालों की पहचान ड्रोन सर्वे से की जा रही है. यह ड्रोन सर्वे जनवरी 2026 तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. दिल्ली जल बोर्ड बाकी अन्य नालों का सर्वे जून 2026 तक पूरा कर लेगा. इस पूरी कवायद का उद्देश्य प्रदूषण के असली स्रोत का पता लगाकर उसे जड़ से खत्म करना है. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. नालों की मैपिंग होने से गंदगी रोकने में अधिकारियों को बड़ी मदद मिलेगी.
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