नर्सिंग एसोसिएशन को मिला कांग्रेस का साथ, पूर्व मंत्री ने कहा- मांगे पूरी नहीं हुई तो सड़कों पर उतरेंगे

कुमार इन्दर, जबलपुर। मध्यप्रदेश नर्सिंग एसोसिएशन के बैनर तले मेडिकल कॉलेज की नर्सेस की हड़ताल को अब कांग्रेस का साथ मिल गया है. कांग्रेस के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने बड़ा बयान दिया है. विधायक लखन घनघोरिया ने कहा कि इस सरकार ने यदि नर्सों का साथ नहीं दिया तो फिर इनके आंदोलन में कांग्रेसी भी उतरेगी.

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लखन घनघोरिया ने कहा कि जिसने कोरोना आपदा में अपनी जान पर खेल कर लोगों की जान बचाई, सरकार उनकी भी अनदेखी कर रही है. नर्सिंग एसोसिएशन के बैनर तले चल रही हड़ताल का आज तीसरा दिन है. जबलपुर में मेडिकल कॉलेज की नर्स एसोसिएशन ने शुक्रवार को पीपीई किट पहनकर मेडिकल अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया. नर्सों ने एक नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया, जिसमें प्रशासन का नर्सों के प्रति व्यवहार दर्शाने की कोशिश की. वहीं गुरुवार को पोस्टकार्ड अभियान चलाकर अपना विरोध सप्ताह जारी रहा.

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गौरतलब है कि सेकेंड ग्रेड वेतन, कोरोना से मृत नर्सेस के परिजनों को नियमित नौकरी, कोविड ड्यूटी करने वाली संविदा नर्सेस की स्थाई नियुक्ति की मांग को लेकर एसोसिएशन आंदोलनरत हैं. अपनी 9 सूत्रीय मांगे पूरी नहीं होने से नाराज नर्सेस ने पोस्टकार्ड में अपनी मांगें लिखकर मुख्यमंत्री के नाम भेजा है. इससे पहले बुधवार को नर्सेस ने जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की थी. काली पट्टी बांधकर काम करते हुए विरोध प्रकट किया था. एसोसिएशन की अध्यक्ष हर्षा सोलंकी के अनुसार यदि सरकार ने जल्दी मांगों पर विचार नहीं किया तो 14 जून के बाद कभी भी प्रदेश के छह मेडिकल कॉलेज की नर्सेस हड़ताल पर चली जाएंगी.

गौरतलब है कि नर्सों की कमी एमपी के 13 मेडिकल कॉलेज और सैकड़ों सरकारी अस्पतालों पहले से ही है. प्रदेश के इन सभी मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों में परमानेंट नर्स की मौजूदा संख्या 28 हजार से 30 हजार है. जबकि मौजूदा स्थिति में प्रदेश में 50 से 60 हजार नर्सों की जरूरत है. सरकार ने तीस हजार के लगभग पदों पर तो नर्सेज की परमानेंट नियुक्ति करके रखी है, लेकिन बचे हुए 15 हजार से 20 हजार पदों पर संविदा के द्वारा नियुक्ति किए जाने का प्रावधान रखा है. जिसका जिम्मा एनएचएम को दिया गया है.

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