आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के पड़ेसी राज्य ओडिशा में पुलिस ने 1 जनवरी 2025 से 28 फरवरी 2026 तक नशे और माओवादी नेटवर्क पर लगातार अभियान चलाकर दोहरा प्रहार किया है। 14 महीने की यह कार्रवाई न सिर्फ अवैध गांजा की खेती और तस्करी को रोकने में सफल रही, बल्कि नक्सलियों के आर्थिक आधार को भी कमजोर कर दिया। इस अभियान में ओडिशा पुलिस ने 48,160 एकड़ में फैली अवैध गांजा की खेती को जड़ से नष्ट करते हुए 2,700 करोड़ के नशे के साम्राज्य पर बड़ा प्रहार किया है।

जानकारी के मुताबिक, 48,160 एकड़ में फैली अवैध गांजा की खेती की कीमत लगभग 1,444 करोड़ रुपये आंकी गई है। साथ ही, राज्यभर में कुल 2,69,166 किलोग्राम तैयार गांजा जब्त किया गया, जिसकी बाजार कीमत लगभग 1,346 करोड़ रुपये है। इन आंकड़ों को मिलाकर देखा जाए तो पुलिस ने लगभग 2,700 करोड़ रुपए कीमत के नशे के साम्राज्य पर बड़ा प्रहार किया है। पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी संगठनों के लिए आय के प्रमुख स्रोत पर भी वार था।

नक्सल नेटवर्क पर असर, गांजा की खेती में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट

ओडिशा के गजपति, रायगढ़ और कोरापुट जैसे संवेदनशील जिलों में गांजा की खेती में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे नक्सल नेटवर्क कमजोर हुआ है। पहले यह नेटवर्क 12 जिलों में सक्रिय था, लेकिन अब यह केवल 2-3 जिलों तक सिमट गया है।

नक्सलियों के खिलाफ इसे ‘दोहरा प्रहार’ माना जा रहा है—एक तरफ अवैध नशे के कारोबार पर प्रहार और दूसरी तरफ नक्सल फंडिंग पर करारा वार। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस आर्थिक नाकेबंदी ने नक्सलियों की गतिविधियों पर प्रत्यक्ष असर डाला है। पुलिस की रणनीति में नशे की खेती और तस्करी को रोकना, बड़े पैमाने पर जब्ती करना और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाना शामिल था। लगातार चलाए गए ऑपरेशनों ने माओवादी संगठनों की वित्तीय स्थिति को कमजोर किया, जिससे उनका क्षेत्रीय प्रभाव भी घटा। यह अभियान यह संकेत देता है कि अगर नशे और नक्सल फंडिंग पर लगातार प्रहार जारी रखा जाए, तो पूरे रेड कॉरिडोर में माओवादी गतिविधियों को काफी हद तक दबाया जा सकता है।

कार्रवाई रही सफल, लेकिन अभी भी चुनौतियां बाकी

गौरतलब है कि यह कार्रवाई सफल रही है, लेकिन अभी भी चुनौतियां बाकी हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अवैध खेती पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि निरंतर निगरानी, ग्रामीण जागरूकता और तस्करी नेटवर्क पर सतत कार्रवाई ही इस सफलता को स्थायी बना सकती है। ओडिशा पुलिस का यह अभियान साबित करता है कि अगर नीति और योजना के साथ सख्ती बरती जाए, तो न सिर्फ अवैध नशे के कारोबार पर लगाम लगाया जा सकता है, बल्कि माओवादी संगठनों की आर्थिक रीढ़ भी तोड़ी जा सकती है।

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