शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में किसी केस में अधिकारी मुख्य सचिव का नाम विलोपित कर पाएंगे। बेवजह मुख्य सचिव को कोर्ट में पार्टी नहीं बनाया जा सकेगा।
जीएडी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मुख्य सचिव किसी भी विभाग के प्रभारी सचिव नहीं होते हैं। इसलिए जहां भी उनका नाम जोड़ा गया है, वहां एसीएस, प्रमुख सचिव, सचिव और कलेक्टर कोर्ट में आवेदन देकर नाम हटवाएंगे, ताकि अनावश्यक नोटिस जारी न हों।
2026 में 38 मुकदमों में 9 में मुख्य सचिव रिसपोंडेंट हैं। दो मामले मुख्य सचिव के नाम से अवमानना के हैं। 2025 में 88 में से 15 मामलों में मुख्य सचिव रिसपोंडेंट थे, एक मामले में उनके नाम से अवमानना जारी थी। साल 2024 में 68 मुकदमों में से 5 में ही मुख्य सचिव को पक्षकार बनाया।
वर्तमान स्थिति में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मप्र सरकार से जुड़े 2.50 लाख प्रकरण लंबित हैं। इनमें हाईकोर्ट जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर बेंच में मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी राज्य सरकार से संबंधित एसएलपी विचाराधीन है। अब सभी विभागों, कलेक्टरों और ओआईसी को हर केस की अपडेट पोर्टल पर दर्ज करनी होगी मुख्यमंत्री उच्च स्तर तक इसकी निगरानी हो सके।
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