Lalluram Desk. मकर संक्रांति का पर्व प्रतिवर्ष की भांति परंपरानुसार 14 जनवरी, बुधवार को मनाया जाएगा. मकर संक्रांति एकादशी पर्व पर सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इस दिन किया गया धर्म, कर्म और दान उत्तम फल प्रदान करता है.

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मकर संक्रांति के फल के संदर्भ में आचार्य पंडित कालूराम शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष संक्रांति कुमारी अवस्था में बाघ पर बैठी हुई, हाथों में गदा धारण किए हुए आ रही है. संक्रांति कुमकुम का लेपन किए हुए हाथों में पुष्प लेकर, पीले वस्त्र धारण किए हुए चांदी के पात्र में दूध का सेवन करते हुए फलों का भक्षण कर रही हैं. संक्रांति वायव्य की ओर देखते हुए पश्चिम दिशा की ओर जा रही है.

संक्रांति फल के संदर्भ में आचार्य ने कहा कि इस वर्ष की मकर संक्रांति जनता के स्वास्थ्य में बाधा, चांदी और स्वर्ण में तेजी एवं खाद्यान्नों के भाव में वृद्धि के साथ ही शक्कर एवं कपास के भाव में तेजी का योग बना रही है. देश के पश्चिम एवं उत्तरी राज्यों के निवासियों को कष्ट, पशुओं को पीड़ा तथा नववधू एवं स्त्रियों को कष्ट, छोटे बालकों को शारीरिक पीड़ा होने का योग दिखाई देता है. समुद्र के निकट स्थित राज्यों पर संकट पड़ सकता है.

इस वर्ष संक्रांति इन राशियों के लिए विशेष रूप से फलदायक है. मिथुन, कन्या, मकर, कुम्भ राशि के जातकों के लिए विशेष फलदायक है. इसके अलावा मेष, वृष, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, धनु एवं मीन राशि के जातकों के लिए कष्टकारक है. जिन राशियों के लिए कष्टकारक है, उन राशियों के जातकों को विशेष रूप से दान करना चाहिए.