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मोदी सरकार के 7 साल पूरे होने पर मजदूर-किसान मनाएंगे ‘काला दिवस’, कानून बदलने की करेंगे मांग

26 मई को मजदूर-किसान कृषि और श्रम कानून में बदलाव वापस लेने की करेंगे मांग

रायपुर। मोदी सरकार की 7 साल पूरे होने पर मजदूर और किसानों ने ‘काला दिवस’ मनाने का फैसला किया है. 26 मई को देशभर में मजदूर किसान काला दिवस मनाएंगे. लॉकडाउन के कारण सभी साथी अपने घर या कार्यस्थल पर काले झंडे या बिल्ला लगाकर यह प्रदर्शन आयोजित करेंगे. काले कृषि कानून की वापसी और एमएसपी की कानूनी गारंटी को लेकर धरना देंगे.

मजदूर-किसान मनाएंगे ‘काला दिवस’

किसानों का कहना है कि किसान आन्दोलन देश के किसानों को कारपोरेट की लूट और नियंत्रण से बचाने, आम जनता की खाद्य सुरक्षा बचाने के लिए लड़ा जा रहा है. बिना उचित प्रक्रिया के संसद में तीन काले किसान कानून पारित घोषित कर दिए गए थे. ये बड़े कारपोरेट और अनाज व्यापार की विशाल विदेशी कम्पनियों द्वारा खेती में लागत के बाजार, फसलों का प्रारूप, फसलों की बिक्री, अनाज के भंडारण, फसलों का प्रसंस्करण और अनाज के बाजार पर पूरा नियंत्रण और अधिकार दिला देंगे.

श्रम कानून में बदलाव वापस लेने की करेंगे मांग

सरकारी खरीद और राशन की सुरक्षा समाप्त कर देंगे. वे जमाखोरी और बिना रोकटोक के खाने की कालाबाजारी को बढ़ावा देंगे. हम देखा रहे हैं कि कैसे सरकार ने कम्पनियों को पेट्रोल, डीजल व खाद के दाम बढ़ाने की छूट दी हुई है, जबकि बेरोजगारी बढ़ रही है. जनता की बदहााली बढ़ रही है.

ये कानून पहली कोरोना लहर में लाॅकडाउन अमल करके पारित किए गए. अब दूसरी कोरोना लहर में इन्हें अमल करने की योजना है. अगर सरकार किसानों के प्रति चिंतित होती तो उसे इन कानूनों को वापस ले लेना चाहिए था. तीन कानूनों के खिलाफ ये लड़ाई तभी बढ़ सकी जब पंजाब के किसानों ने कोरोना के डर और राजकीय दमन का मुकाबला करते हुए इन कानूनों का विरोध किया. कोरोना का राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर जिससे वह जनता पर पुलिस का भय पैदा करना चाहती है. अपने पक्ष में छूठा प्रचार करना चाहती है. जनता को इलाज देने की अपनी जिम्मेदारियों पूरी न कर छिपाना चाहती है और कारपोरेट की मदद करना चाहती है.

इस RSS-भाजपा की सरकार को जनता से कोई लगाव नहीं है. वह झूठ बोलने में विश्वास करती है. लोगों पर जुर्माना लगाती है, उन पर केस दर्ज कर जेल भेज देती है. कोई मांग उठाएं तो वह उन पर सरकार का अपमान करने का आरोप लगा देती है. लोगों को साम्प्रदायिक रूप से बांट रही है. वह बड़े कारपोरेट घरानों और विदेशी कम्पनियों की सेवा में समर्पित है, जबकि ये पहले से ही बड़े-बड़े बैंक व बचत खातों के मालिक हैं.

देश के समस्त मजदूर व किसान संगठन इसके खिलाफ 26 मई को काला दिवस मनाएंगे. सीटू के राज्य सचिव धर्मराज महापात्र ने बताया कि प्रदेश में भी कल घरों में काले झंडे फहराकर प्रदर्शन किया जाएगा.

ये हैं किसानों और मजदूरों की मांगें

  • 3 काले किसान कानून की वापसी और एमएसपी की कानूनी गारंटी
  • मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिता वापस लेने
  • निजीकरण बंद करने
  • सभी को वेतन
  •  रोजगार
  • आश्रय की सुरक्षा देने
  •  प्रत्येक नागरिक को मुफ्त वैक्सीन देने
  •  गैर आयकर दाता परिवार को 7500/ दिए जाने
  • कारपोरेट पक्षधर नीति बदलने
  • डीजल, पेट्रोल और खाद के दाम आधे करने
  • मनरेगा में सबको काम देने
  • सबको राशन देने
  • जमीन, जीविका और भोजन की सुरक्षा की मांग को लेकर धरना देंगे

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