पंजाब के 852 स्कूलों की रंगाई-पुताई के आदेश से बड़ा विवाद हो गया है। दरअसल पंजाब सरकार ने 22 दिसंबर को स्कूलों की बिल्डिंग को पेंट करने का आदेश जारी किया। पंजाब के 852 सरकारी स्कूलों को पीला और नीला रंग से कलर किया जाएगा. इसके बाद विपक्षी दलों का आरोप है कि भगवंत मान सरकार स्कूलों को आम आदमी पार्टी के नीले-पीले झंडे में रंग रही है।

हालांकि आम आदमी पार्टी का कहना है कि पुताई के लिए रंगों का कोड शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने तय किया है, सरकार ने नहीं। डायरेक्टर जनरल ऑफ स्कूल एजुकेशन अरविंद कुमार एमके ने बताया कि रंगों के चुनाव के पीछे राजनीतिक सोच नहीं है। सरकार सिर्फ उन्हीं स्कूलों को पुतवा रही है, जिसमें पांच साल या उससे अधिक समय से पेंट नहीं हुआ है।

पंजाब सरकार ने 22 दिसंबर को स्कूलों की बिल्डिंग को पेंट करने का आदेश जारी किया। शुक्रवार को यह सामने आया कि पंजाब के 852 सरकारी स्कूलों को पीला और नीला रंग से कलर किया जाएगा। इसका खुलासा तब हुआ, जब आदेश के साथ डेमो फोटो भी शिक्षा विभाग को भेजा गया। यह रंग आम आदमी पार्टी के झंडे से मिलते-जुलते हैं। सरकार ने फर्स्ट फेज में 23 जिलों के स्कूलों को पुताई के लिए चुना और जिला शिक्षा अधिकारियों को 17.44 करोड़ रुपये जारी किए गए। कुल मिलाकर पहले चरण में 852 स्कूलों को रंगा जाएगा। इनमें से सबसे ज्यादा 102 स्कूल सीएम भगवंत मान के होम डिस्ट्रिक्ट संगरूर में है। इसके साथ ही रोपड़ के 37, अमृतसर के 84 और लुधियाना के 70 स्कूलों को भी नीले-पीले रंग में नजर आएंगे।


सरकार के इस आदेश पर शिरोमणि अकाली दल के ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि स्कूलों को आम आदमी पार्टी के झंडे के कलर में रंगने का फैसला शर्मनाक है और यह एजुकेशन सिस्टम के लिए एक गंभीर खतरा भी है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल राज्य की संपत्ति हैं, किसी एक राजनीतिक दल की नहीं। उन्होंने यह आदेश तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की।

आप के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने इस पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि हर रंग किसी न किसी पार्टी से जुड़ा होता है। लाल रंग कम्युनिस्टों का है तो भगवा बीजेपी का है। नीला रंग हमेशा से शिरोमणि अकाली दल से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अपनी पसंद के अनुसार स्कूलों के लिए रंग कोड तय किया होगा। नीले और पीले रंग हमेशा से सरकारी इमारतों को पेंट करने के लिए पसंदीदा रहा है।

डायरेक्टर जनरल ऑफ स्कूल एजुकेशन अरविंद कुमार एमके ने बताया कि रंगों के चयन में कोई राजनीति नहीं है। शिक्षा विभाग उन्हीं स्कूलों को पेंट करवा रहा है, जहां पिछले पांच साल या उससे अधिक समय से काम नहीं हुआ है। अधिकांश जिलों में काम पूरा हो चुका है। इस कलर कोडिंग के लिए धन पूरी तरह से राज्य के बजट से प्रदान किया जा रहा है।