लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (OM Birla) के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। मंगलवार को कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की अगुआई में यह प्रस्ताव लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव के समर्थन में 118 सांसद खड़े हुए हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव में टीएमसी विपक्ष के साथ नहीं है। प्रस्ताव सौंपने की प्रक्रिया में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सांसद मोहम्मद जावेद शामिल थे।

विपक्ष ने यह कदम स्पीकर के कार्यशैली और पार्लियामेंट के संचालन के तरीकों पर असंतोष जताने के चलते उठाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रस्ताव संसदीय इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि इसके समर्थन में बड़ी संख्या में सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। अब आगे की कार्रवाई में संसद अध्यक्ष या स्पीकर इस प्रस्ताव को स्वीकार करेंगे और चर्चा/मतदान की प्रक्रिया तय करेंगे। इसके बाद ही प्रस्ताव पर बहस और वोटिंग होगी।

सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और कई अन्य विपक्षी दलों के कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया।

बीते 2 फरवरी को, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़ा विषय उठाने की अनुमति न मिलने, सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सांसदों के निलंबित होने और अन्य मुद्दों को लेकर लोकसभा में गतिरोध की स्थिति बनी रही। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही, जबकि सत्तापक्ष के नेताओं को स्वतंत्रता है कि वे किसी भी मुद्दे पर बोल सकें।

क्या है स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया

बीते 2 फरवरी को, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़े विषय को उठाने की अनुमति न मिलने, सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सांसदों के निलंबित होने और अन्य मुद्दों को लेकर लोकसभा में गतिरोध की स्थिति बनी थी। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही, जबकि सत्तापक्ष के नेताओं को स्वतंत्र बोलने की छूट है।

अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया

लोकसभा में स्पीकर को हटाने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया में निम्न कदम होते हैं, प्रस्ताव में स्पीकर पर लगे साफ आरोपों का उल्लेख किया जाता है; इसमें व्यंग्य या अनुमान की जगह नहीं होती। नियम 1 के तहत नोटिस को कामकाज की सूची में दर्ज किया जाता है। लोकसभा सचिवालय नोटिस मिलने के 14 दिन के भीतर प्रस्ताव लाने की तारीख तय करता है। प्रस्ताव को कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन होना आवश्यक है। लोकसभा में बहुमत से पारित होने पर ही स्पीकर को हटाया जा सकता है।

इतिहास में अब तक केवल तीन बार लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए गए हैं:

18 दिसंबर 1954: तत्कालीन स्पीकर जी. वी. मावलंकर के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, जिसे बहस के बाद खारिज कर दिया गया।

24 नवंबर 1966: स्पीकर हुकम सिंह के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया, लेकिन समर्थन में 50 से कम सदस्य होने के कारण यह गिर गया।

15 अप्रैल 1987: स्पीकर बलराम झाकड़ के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, जिसे बहस के बाद खारिज कर दिया गया

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