पाकिस्तान ने कहा कि वह सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) का कथित उल्लंघन करके पश्चिमी नदियों पर संचालित भारत की किसी भी विकास गतिविधि को उसके साथ राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर उठाएगा. विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि आईडब्ल्यूटी एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता बना हुआ है और संधि को रोकने का कोई प्रावधान नहीं है.

चिनाब-झेलम नदी को लेकर क्या बोला पाकिस्तान?

पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के एक दिन बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कदम उठाए थे, जिनमें 1960 की सिंधु जल संधि को सस्पेंड करना भी शामिल था. अंद्राबी ने कहा कि चिनाब, झेलम और नीलम नदी पर बनी कोई भी परियोजना आईडब्ल्यूटी के तहत जांच के दायरे में आती है और हमारे सिंधु जल आयुक्त ने चिनाब नदी पर कुछ परियोजनाओं को लेकर पत्र लिखा है.

उन्होंने कहा, ‘अगर झेलम और नीलम में कुछ भी विकास कार्य होते हैं तो जाहिर है कि हम इसे भारत के साथ, सिंधु आयुक्त के स्तर पर उठाएंगे. हम इसे भारत के साथ राजनीतिक/राजनयिक स्तर पर और प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठा सकते हैं.’ अंद्राबी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के उस बयान को खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान दशकों से आतंकवाद को समर्थन देने के लिए प्रशिक्षण शिविर चला रहा है.

पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने अफगानिस्तान के साथ चल रहे हालातों पर भी बयान दिया. उन्होंने कहा, ‘आतंकवाद के मद्दे को छोड़कर पाकिस्तान का अफगानिस्तान से कोई द्विपक्षीय मुद्दा नहीं है.’

एस जयशंकर ने पाकिस्तान को बताया बुरा पड़ोसी

बता दें कि, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस साल के शुरुआत में पाकिस्तान को बुरा पड़ोसी बताया और कहा कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है. उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्य से हमारे पास बुरे पड़ोसी हैं. अगर कोई देश जानबूझकर, लगातार और बिना पछतावे के आतंकवाद जारी रख रहा है, तो हमें आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है’

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