पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक अब्दुल बासित भारतीय शहरों पर हमले की धमकी देकर अपने ही देश में घिर गए हैं। अमेरिका की कार्रवाई के जबाब में दिल्ली और मुंबई पर हमले की बात अब्दुल बासित ने कही है। उनके बयान को पाकिस्तान के लोगों ने हल्का और स्तरहीन कहा है। पाकिस्तानी सोशल यूजर्स ने कहा है कि पढ़े-लिखे और वर्षों तक विदेश सेवा में रहे लोग अगर ये बाते करेंगे तो फिर देश का बंटाधार होना तय है।
पाकिस्तानी पत्रकार जैगम खान ने अब्दुल बासित पर टिप्पणी करते हुए एक्स पर लिखा, ‘कई पुराने पाकिस्तानी राजदूतों की बातें सुनकर ऐसा लगता है कि उन्होंने तीस साल विदेश मंत्रालय में नहीं बल्कि किसी मेंटल हेल्थ रिकवरी सेंटर में बिताए। इतना वक्त बिताने के बाद वह बिना ठीक हुए ही वापस आ गए है।’
कोई इतनी बेवकूफी कैसे कर सकता है
एक्टिविस्ट बिलाल गौरी ने अब्दुल बासित पर लंबा पोस्ट लिखा है। वह लिखते हैं, ‘विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि कूटनीति वह कला है, जिसके जरिए लोगों से ‘भाड़ में जाने’ के लिए इस खूबसूरत तरीके से कहा जाता है कि वे रास्ता पूछने लगते हैं। हमारे यहां इस नाजुक काम के लिए किस-किस तरह के अजीब लोगों को चुन लिया जाता है।’
बिलाल ने आगे कहा कि अब्दुल बासित भारत में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर और जर्मनी में राजदूत रहे हैं। वह विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का पद संभाल चुके हैं। वह कहते हैं कि अगर अमेरिकी ओर से पाकिस्तान पर हमला होता है तो हम क्योंकि अमेरिका और इजरायल को निशाना नहीं बना सकते तो हमें भारत पर हमला कर देना चाहिए। दिल्ली और मुंबई पर हमें मिसाइल दागनी चाहिए।
बासित का बयान गैर-जिम्मेदाराना
गौरी कहते हैं कि बासित रिटायर हो चुके हैं लेकिन फिर भी वह इस तरह की बेवकूफी भरी बातें नहीं कर सकते हैं। पहली बात तो यह कि उनको यह पता नहीं है कि इजरायल हमारी मिसाइलों की पहुंच के अंदर है। दूसरी बात यह कि भला ऐसी स्थिति में हम भारत पर क्यों ही हमला करेंगे। यह बयान पाकिस्तान की कूटनीतिक नीति पर एक ‘आत्मघाती हमले’ से कम नहीं है।
अब्दुल बासित का बयान ABN न्यूज के साथ बातचीत में आया। उनसे ईरान युद्ध को लेकर सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा कि ईरान गिर जाता है और इजरायल हमारे पड़ोस में आकर बैठ जाता है। ऐसे हालात बन जाते हैं कि अमेरिका हमारी परमाणु क्षमता को तबाह करने की कोशिश करता है।
भारत होना चाहिए टारगेट
बासित ने कहा कि अगर ऐसे हालात बन जाते हैं कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर हमला कर दिया तो हम क्या करेंगे। अगर हमारे न्यूक्लियर रेंज में अमेरिका नहीं है, हम क्षेत्रीय इलाकों में उनके अड्डों पर भी नहीं पहुंच सकते। हम इजरायल पर भी हमला नहीं कर सकते तो हमारे लिए भारत रास्ता होगा।
अब्दुल बासित ने आगे कहा कि अगर हमारी रेंज अमेरिका अड्डों तक नहीं है तो हमें तो बिना सोचे समझे भारत पर हमला कर देना है। मुंबई पर कर देना है, नई दिल्ली पर कर देना है। हमें तो छोड़ना नहीं है। देखी जाएगी, जो कुछ बाद में होता है। हमारे पास और कोई रास्ता नहीं होगा। हमें इसी तरह से जवाब देना होगा।
क्या यह ‘डिप्लोमैटिक सिग्नलिंग’ या दबाव बनाने की रणनीति है?
दरअसल, ऐसे बयान अक्सर ‘डिप्लोमैटिक सिग्नलिंग’ का हिस्सा हो सकते हैं। जब दो देशों के बीच औपचारिक संवाद सीमित या तनावपूर्ण होता है, तो इस तरह के सार्वजनिक बयान एक तरह के ‘मैसेज कैरियर’ बन जाते हैं। Pakistan की ओर से भारत और अमेरिका दोनों को एक साथ जोड़कर दिया गया यह बयान इस ओर इशारा करता है कि क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर एक व्यापक चेतावनी का नैरेटिव बनाया जा रहा है। हालांकि, इस तरह की भाषा जोखिम भरी भी होती है, क्योंकि यह अनावश्यक तनाव को और बढ़ा सकती है और गलतफहमियों को जन्म दे सकती है।
क्या घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय दबाव है वजह?
यह साफ है कि, इस बयान को सिर्फ भारत-पाक संदर्भ में देखना पर्याप्त नहीं होगा। Afghanistan के साथ बढ़ते तनाव, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों और वैश्विक दबावों के बीच पाकिस्तान में घरेलू नैरेटिव को मजबूत करने की जरूरत भी एक कारण हो सकती है। ऐसे बयानों के जरिए अक्सर राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद को उभारने की कोशिश की जाती है। यही वजह है कि कई बार “काल्पनिक युद्ध” की बात भी घरेलू राजनीति में प्रभाव डालने का माध्यम बन जाती है। इस संदर्भ में बासित का बयान एक बड़े राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक फ्रेमवर्क का हिस्सा भी माना जा सकता है।
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