इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग का आज चौथा दिन है। इस बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर कहा कि जोयोनिज्म (इजराइल) मुस्लिम दुनिया में अस्थिरता की बड़ी वजह है और यह मानवता के लिए खतरा है। असिफ ने यह भी कहा कि मौजूदा संघर्ष ईरान पर थोपा गया है, जबकि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत के जरिए समझौता करने को तैयार था। उन्होंने पाकिस्तान की परमाणु ताकत को बाहरी खतरों के खिलाफ देश की सुरक्षा की ढाल बताया। इसके अलावा उन्होंने अफगानिस्तान, ईरान और भारत को मिलाकर पाकिस्तान विरोधी एजेंडा बनाया जा रहा है, ताकि पाकिस्तान की सरहदें असुरक्षित हो जाएं, हर तरफ से दुश्मन घेर लें और पाकिस्तान कमजोर हो जाए

बता दें कि, ईरान में अब तक 742 लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें 176 बच्चे हैं। 750 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बता दें कि, पाकिस्तान इजराइल को मान्यता नहीं देता है, इसलिए वह इसे जोयोनिज्म कहता है।

पाकिस्तान की पूर्व राजदूत बोलीं- शरीफ सरकार ट्रम्प का गाजा बोर्ड छोड़ दे

पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने कहा है कि नवाज शरीफ की सरकार को ट्रम्प के बनाए “बोर्ड ऑफ पीस” से बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान को शुरुआत में ही इस बोर्ड में शामिल नहीं होना चाहिए था। लोदी ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रम्प की सरकार कई देशों पर हमले कर चुकी है और गाजा में इजराइल की कार्रवाई में उसकी भूमिका रही है।

लेबनान में हिजबुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर बैन

लेबनान में हिजबुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर सरकार ने तत्काल प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। राष्ट्रपति मिशेल औन ने कहा कि अब युद्ध और शांति का निर्णय केवल लेबनानी राज्य के हाथ में होगा। सोमवार को कैबिनेट के फैसले के बाद औन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि यह कदम राज्य के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है। उन्होंने साफ किया कि हिजबुल्लाह को अपने हथियार सरकार को सौंपने होंगे और इस फैसले से पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं है।

यह निर्णय लेबनान-इजराइल सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच लिया गया है। हाल में हिजबुल्लाह ने इजराइल की ओर रॉकेट दागे थे। संगठन का कहना था कि यह कार्रवाई नवंबर 2024 में हुए युद्धविराम के बावजूद इजराइल द्वारा किए गए सैकड़ों हमलों के जवाब में की गई। रिपोर्ट के अनुसार, ताजा इजराइली बमबारी में लेबनान में कम से कम 52 लोगों की मौत हुई है। हिजबुल्लाह ने यह भी कहा कि उसके हमले इजराइल-अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई के जवाब में थे।

फ्रांस अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए तैयार

फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा है कि अगर फ्रांस के सहयोगी देश मदद मांगते हैं, तो फ्रांस उनकी रक्षा के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर फ्रांस हस्तक्षेप करने का अधिकार रखता है। उन्होंने बताया कि मौजूदा ईरान संघर्ष की वजह से क्षेत्र के कई देश इसमें शामिल हो रहे हैं, जिनसे फ्रांस के रक्षा समझौते और सैन्य हित जुड़े हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि प्रभावित देशों में लगभग 4 लाख फ्रांसीसी नागरिक मौजूद हैं। अगर खतरा बढ़ता है, तो फ्रांस उन्हें कॉमर्शियल और सैन्य उड़ानों के जरिए वापस लाने के लिए तैयार है।

नेतन्याहू बोले- ईरान से जंग लंबी नहीं चलेगी

इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध लंबा और अंतहीन नहीं होगा। उनका कहना है कि यह युद्ध क्षेत्र में शांति लाने का रास्ता बना सकता है। नेतन्याहू ने कहा कि पहले भी अब्राहम अकॉर्ड के तहत इजराइल ने अरब के 4 देशों के साथ शांति समझौते किए थे। नेतन्याहू ने कहा कि अब अमेरिका के साथ मिलकर काम करने से और भी देशों के साथ शांति समझौते हो सकते हैं।

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