दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को टेरर फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को जमानत दे दी। विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने शब्बीर शाह को ये राहत प्रदान की। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें टेरर फंडिंग केस में बेल दी थी. अदालत ने लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी को आधार माना. हालांकि जमानत के साथ सख्त शर्तें लगाई गई हैं. नेता शब्बीर शाह को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है.

शब्बीर शाह को 4 जून 2019 को NIA ने गिरफ़्तार किया था. जांच एजेंसी का आरोप था कि यह मामला कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों के लिए कथित तौर पर धन जुटाने से जुड़ा है.

कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ज़मानत पर रिहाई का आदेश दिया. इससे पहले, 12 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने भी शब्बीर शाह को टेरर फंडिंग के एक अन्य मामले में ज़मानत पर रिहाई का आदेश दिया था. शाह को राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने 4 अक्टूबर 2019 को दाखिल अपनी दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी बनाया था.

शब्बीर शाह को 4 जून 2019 को NIA ने गिरफ़्तार किया था. जांच एजेंसी का आरोप था कि यह मामला कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों के लिए कथित तौर पर धन जुटाने से जुड़ा है. मामले की जांच कई सालों से जारी है और अदालत में इसकी सुनवाई भी लंबित है.

शब्बीर शाह पर आरोप हैं कि उसने जम्मू और कश्मीर में देश विरोधी अलगाववादी आंदोलन खड़ा करने की गरज से मुठभेड़ों में मारे गए आतंकवादियों के परिवारों को श्रद्धांजलि देने के नाम पर हवाला लेनदेन के ज़रिए धन लिया और LOC ट्रेड के ज़रिए फंड जुटाने में अहम भूमिका निभाई.

पिछले पखवाड़े सुप्रीम कोर्ट ने शाह की लंबी न्यायिक हिरासत और ट्रायल में देरी को लेकर सामने आई कुछ अनियमितताओं पर भी गंभीर टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में मुकदमा अपेक्षा से अधिक लंबा खिंच रहा है और आरोपी लंबे समय से जेल में है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में जमानत के साथ कड़ी शर्तें लगाई हैं. वह जेल से बाहर आने के बाद भी बिना अनुमति दिल्ली से बाहर नहीं जा सकते. उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और नियमित रूप से तय अंतराल पर NIA को रिपोर्ट करना होगा. पटियाला हाउस कोर्ट में बेल बॉन्ड भरने और सभी शर्तें पूरी करने के बाद, यदि किसी अन्य केस में उनकी हिरासत का आदेश नहीं है, तो उन्हें रिहाई मिल सकती है. यदि किसी अन्य मामले में गिरफ्तारी या वारंट है, तो रिहाई रुक सकती है या शर्तें पूरी न होने पर देरी हो सकती है.

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