पटना। शहर के खगौल लख के पास शनिवार को हुई 15 किलो सोने की सनसनीखेज लूट के तार अब बिहार से लेकर गुजरात तक जुड़ गए हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले 6 बदमाश स्थानीय हैं, लेकिन उनकी ‘लाइनिंग’ (मुखबिरी) गुजरात के एक व्यक्ति ने की थी। अपराधियों ने कस्टम अधिकारी बनकर राजकोट के कारोबारी सुनील भाई के कर्मचारियों को निशाना बनाया।
चोरी की कार और दिल्ली कनेक्शन
वारदात में इस्तेमाल की गई कार दिल्ली से चोरी की गई थी, जिस पर पूर्णिया के एक व्यक्ति की गाड़ी का फर्जी नंबर प्लेट लगाया गया था। पुलिस ने इस कार को नौबतपुर से और एक बाइक को एम्स गोलंबर के पास से बरामद किया है। लूट के तुरंत बाद अपराधियों ने बैग में लगा जीपीएस (GPS) निकालकर फेंक दिया था ताकि उनका पीछा न किया जा सके।
जांच के घेरे में पीड़ित कर्मचारी
इस मामले में एसआईटी (SIT) की टीम सोना कारोबारी के दो कर्मचारियों, महेश और प्रिंस से कड़ी पूछताछ कर रही है। महेश पिछले 6 साल से जबकि प्रिंस 6 महीने से कार्यरत है। पुलिस उनके मोबाइल नंबरों की सीडीआर (CDR) खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि घटना के समय उनकी लोकेशन और कॉल हिस्ट्री संदिग्ध थी या नहीं।
सवालों के घेरे में ‘अपहरण’ की कहानी
- पुलिस को इस पूरी लूट में कई विरोधाभास नजर आ रहे हैं:
- लूट के बाद बदमाशों ने केवल महेश को ही कार में क्यों बिठाया?
- प्रिंस को सुरक्षित क्यों छोड़ दिया गया?
- महेश ने बदमाशों द्वारा बांधे गए हाथ और मुंह को खुद इतनी आसानी से कैसे खोल लिया?
- नौबतपुर में उसे अकेला छोड़कर लुटेरे क्यों भाग गए?
40 पुलिसकर्मियों की टीम कर रही छापेमारी
दानापुर एसडीपीओ वन, शिवम धाकड़ के नेतृत्व में 40 सदस्यीय विशेष टीम अपराधियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी कर रही है। फिलहाल पीड़ित कारोबारी और उनके कर्मचारी पटना में ही हैं और पुलिस बाकरगंज के उन व्यापारियों से भी संपर्क कर रही है, जिन्हें यह सोना सप्लाई किया जाना था।
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