पटना। समाज के सबसे दंश झेलने वाले वर्ग को मुख्यधारा में वापस लाने और उन्हें न्याय का अहसास कराने की दिशा में बिहार सरकार और न्यायपालिका एक बड़ी पहल करने जा रही है। आगामी 29 मार्च को राजधानी पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जहां राज्यभर की 60 एसिड अटैक पीड़िताओं को आर्थिक सहायता और कानूनी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

​मुख्य न्यायाधीश की देखरेख में आयोजन

​यह गरिमामयी कार्यक्रम पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सीधे निर्देश और संरक्षण में आयोजित हो रहा है। बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज ऑथोरिटी (BSALSA) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का समय सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। प्राधिकरण के सदस्य सचिव, धर्मेंद्र कुमार के अनुसार, यह पहल नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) के मिनिमम एक्शन प्लान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

​आर्थिक संबल: 3 लाख की न्यूनतम सहायता

​इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पीड़ितों को मिलने वाली वित्तीय राहत है। चिन्हित की गई सभी 60 पीड़िताओं को 3 लाख रुपये की न्यूनतम मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी। खास बात यह है कि यह राशि स्वयं मुख्य न्यायाधीश के हाथों वितरित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, विक्टिम कंपेंसेशन बोर्ड द्वारा समीक्षा के उपरांत निर्धारित की गई अन्य अतिरिक्त मुआवजा राशि भी पीड़िताओं को सौंपी जाएगी, ताकि उनके उपचार और भविष्य की राह आसान हो सके।

​केवल सहायता नहीं, सशक्तीकरण है लक्ष्य

  • ​प्राधिकरण का स्पष्ट मानना है कि घाव सिर्फ आर्थिक मदद से नहीं भरते। इसीलिए, इस आयोजन में सशक्तीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। कार्यक्रम के दौरान:
  • ​पीड़िताओं को उनके कानूनी अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
  • ​पुनर्वास की योजनाओं और सरकारी योजनाओं से जुड़ने के तरीके बताए जाएंगे।
  • ​समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक वापसी के लिए मनोवैज्ञानिक और सामाजिक परामर्श की व्यवस्था होगी।

​न्याय की पहुंच हर द्वार तक

​धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज का कोई भी पीड़ित वर्ग खुद को अकेला न समझे। सालभर चलने वाले इन अभियानों के जरिए न्याय और सहायता को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। 29 मार्च का यह कार्यक्रम एसिड अटैक सर्वाइवर्स के जीवन में एक नई उम्मीद की किरण लेकर आएगा।