पटना। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और विधायकों की अनुपस्थिति ने बिहार की राजनीति में अलग ही मोड लिया है।महागठबंधन के चार विधायकों, जिनमें कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक शामिल हैं, द्वारा मतदान का बहिष्कार करने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार को पटना स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
पुतला दहन और तीखे नारे
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में एनडीए सरकार की कथित विधायक चोरी नीति के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने वोट चोर गद्दी छोड़ विधायक चोरी बंद करो और राहुल गांधी जिंदाबाद के नारों के साथ माहौल गरमा दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एनडीए ने अनैतिक रूप से महागठबंधन के विधायकों को प्रभावित किया है।
विधायकों की बगावत के पीछे के तर्क
मतदान से दूरी बनाने वाले विधायकों ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
जातीय समीकरण की अनदेखी: मनिहारी विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने स्पष्ट किया कि दलित, अल्पसंख्यक और ओबीसी वर्ग की अनदेखी के कारण उन्होंने मतदान का बहिष्कार किया। उनका कहना था कि इन वर्गों का प्रतिनिधित्व जरूरी था।
उम्मीदवार चयन पर सवाल: कांग्रेस विधायक सुरेंद्र ने राजद के उम्मीदवार चयन को गलत ठहराया। उनके अनुसार, दीपक यादव या मुकेश सहनी बेहतर विकल्प होते। उन्होंने कहा, राजद ने ऐसे व्यक्ति को चुना जिसका जनाधार हमारे खिलाफ है।
सम्मान की लड़ाई: फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास ने दोटूक कहा कि यदि विधायकों को सम्मान नहीं मिलेगा, तो वे वोट भी नहीं देंगे। वे पार्टी की किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
पारिवारिक कारण: वहीं, राजद विधायक फैसल रहमान ने राजनीतिक बगावत से इनकार करते हुए दिल्ली में मां के इलाज को अपनी अनुपस्थिति का कारण बताया।
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि बिहार महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। एक ओर जहां नेतृत्व एकजुटता का दावा कर रहा है, वहीं धरातल पर असंतोष की लहर साफ दिख रही है।
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