पटना। बिहार की राजधानी पटना मंगलवार को रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। NEET छात्रा की संदिग्ध मौत और राज्य में बढ़ते महिला अपराधों के खिलाफ AISA और AIPWA की कार्यकर्ताओं ने विधानसभा घेराव के लिए मार्च निकाला। गांधी मैदान से शुरू हुआ यह प्रदर्शन तब हिंसक हो गया जब डाकबंगला चौराहे पर पुलिस ने उग्र भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज कर दिया।
बैरिकेडिंग तोड़ आगे बढ़ीं प्रदर्शनकारी
प्रदर्शनकारी महिलाएं ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’ के समापन पर पटना पहुंची थीं। पुलिस ने पहले उन्हें जेपी गोलंबर पर रोकने की कोशिश की, लेकिन महिलाएं बैरिकेडिंग तोड़कर डाकबंगला चौराहे तक जा पहुंचीं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव से पहले सुरक्षा के वादे किए गए, लेकिन अब हत्या और बलात्कार जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का भी सहारा लिया।
प्रशासन पर मामले को दबाने का आरोप
AIPWA की महासचिव मीना तिवारी ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि नई सरकार के आते ही अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए हैं। पटना के शंभू और परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल के मामलों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस परिजनों पर ही दबाव बना रही है। CCTV फुटेज और फॉरेंसिक जांच में देरी को लेकर भी प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए गए।
प्रमुख मांगें और न्याय की गुहार
प्रदर्शनकारियों की स्पष्ट मांग है कि केवल CBI जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच होनी चाहिए। आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ ‘बेटी बचाओ’ के नारे को ‘बलात्कारी बचाओ’ की मंशा बताकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। फिलहाल शहर के प्रमुख चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात है।
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