पटना। पटना विश्वविद्यालय (PU) के नवनिर्मित भवनों के उद्घाटन समारोह के दौरान हुए उपद्रव के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में हुए इस हंगामे को लेकर पीरबहोर थाने में छात्र संघ अध्यक्ष शांतनु शेखर सहित 6 नामजद और 35 अज्ञात छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। ड्यूटी पर तैनात प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी वीरेंद्र चौधरी की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है।

​सरकारी कार्य में बाधा और पुलिस से धक्का-मुक्की

​शिकायत के अनुसार, 30 मार्च को जब मुख्यमंत्री 147.29 करोड़ की लागत से बने प्रशासनिक और एकेडमिक ब्लॉक का उद्घाटन करने पहुंचे थे, तभी छात्रों का एक गुट वहां पहुंचा और नारेबाजी शुरू कर दी। आरोप है कि छात्रों ने न केवल सरकारी कार्य में बाधा डाली, बल्कि विधि-व्यवस्था को भी भंग किया। समझाने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मियों और मजिस्ट्रेट के साथ धक्का-मुक्की की गई, जिसमें कुछ जवानों को चोटें भी आईं। पूरी घटना की वीडियोग्राफी के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई है।

​कुलपति की चुप्पी पर उठे सवाल

​इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) अजय कुमार की भूमिका को लेकर है। दर्ज आवेदन में स्पष्ट कहा गया है कि घटना के वक्त कुलपति वहीं मौजूद थे, लेकिन उन्होंने उग्र छात्रों को रोकने या समझाने का कोई प्रयास नहीं किया। प्रशासन ने आशंका जताई है कि इस हंगामे को कुलपति का मौन समर्थन प्राप्त था।

​विरोध और समर्थन के बीच बंटा परिसर

​हंगामे की मुख्य वजह कार्यक्रम में छात्र प्रतिनिधियों को आमंत्रित न करना और शिलापट्ट पर कुलपति का नाम न होना बताया गया। छात्र संघ अध्यक्ष शांतनु शेखर ताला लेकर गेट बंद करने पहुंचे थे, हालांकि पुलिस ने उन्हें रोक दिया। एक ओर जहां छात्र उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा और शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को घेरकर विरोध कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर छात्रों का एक गुट शेर आया-शेर आया और नीतीश कुमार जिंदाबाद के नारे लगाकर मुख्यमंत्री का समर्थन भी कर रहा था।

​विश्वविद्यालय को मिले आधुनिक भवन

​हंगामे के बावजूद मुख्यमंत्री ने G+8 प्रशासनिक भवन और G+9 एकेडमिक भवन (कला संकाय) का उद्घाटन किया। इन आधुनिक भवनों के शुरू होने से अब पटना विश्वविद्यालय का मुख्यालय नए ब्लॉक में शिफ्ट हो जाएगा, जिससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी।