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बिलासपुर। बस्तर के उमरकोट-जगदलपुर मार्ग पर ओडिश सीमा से 25 अप्रैल 2022 को बेचने ले जाए जा रहे एक जीवित पैंगोलिन को जब्त कर रायपुर लाकर जंगल सफारी में रखने के मामले में आज छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई. समय अभाव के कारण अब सुनवाई सोमवार को होगी.

रायपुर निवासी याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी ने बताया कि वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने अपने अध्ययन में कहा है कि चींटी दीमक खाने की विशेष आदत के कारण और इनके सामाजिक और प्रजनन की समझ नहीं होने के कारण ये बंधक जीवन नहीं जी पाते. यह जानकारी होने के बावजूद वन विभाग और जंगल सफारी प्रबंधन ने अनुसूची-1 के तहत संरक्षित और आईसीयूएन की रेड बुक में संकटग्रस्त घोषित भारतीय पैंगोलिन को बंधक बना रखा है और चींटी दीमक जुगाड़ कर के इसे खिला रहे हैं.

जू अथॉरिटी की अनुशंसा भी नहीं मान रहे अधिकारी

सिंघवी ने बताया कि केंद्रीय जू अथॉरिटी ने वर्ष 2021 में पैंगोलिन के पुनर्वास के लिए मार्गदर्शिका जारी कर रखी है. जिसके तहत जब्त पैंगोलिन को उसी जंगल के घने इलाके में छोड़ा जाना है जहां से उसे पकड़ा गया है. जहां रोड, रेल और मानव बस्ती ना हो.

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को है जानकारी

सिंघवी ने बताया कि उन्होंने 6 मई को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को पत्र लिखकर बंधक पैंगोलिन को छोड़ने की मांग की थी. उन्होंने ये भी बताया था कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी भी वन्य जीव को बिना उनके आदेश के बंधक नहीं बनाया जा सकता है. खुद उनके कार्यालय ने बताया है कि पैंगोलिन को बंधक बनाने का आदेश उन्होंने जारी नहीं किया है. इसके बावजूद भी प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं और ना ही बंधक पेंगोलिन को छोड़ रहे हैं.

डीएफओ के आदेश के बिना रेंजर ने लाकर छोड़ा

पैंगोलिन जब्त करने के बाद वन परीक्षेत्र अधिकारी करपावंद, जिला बस्तर ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जगदलपुर को आवेदन देकर कहा कि जब्त वन्य प्राणी पैंगोलिन दुर्लभ प्रजाति का वन्य प्राणी है, इसे जंगल में छोड़ने पर ग्रामीणों के द्वारा हानि पहुंचाई जा सकती है. सुरक्षा की दृष्टि से शासन द्वारा वर्तमान में निर्मित जंगल सफारी नया रायपुर में रखना उचित होगा. न्यायिक मजिस्ट्रेट जगदलपुर द्वारा वन परीक्षेत्र अधिकारी के आवेदन पर ही आदेशित किया गया कि प्रकरण में जब्त वन्यजीव पैंगोलिन को वनमंडल अधिकारी जगदलपुर के माध्यम से जंगल सफारी नया रायपुर में विधि अनुसार रखे जाने की आदेशित किया जाता है. लेकिन वन परीक्षेत्र अधिकारी द्वारा बिना वनमंडल अधिकारी जगदलपुर के आदेश के पैंगोलिन को जंगल सफारी लाकर छोड़ दिया आश्चर्य की बात है कि जंगल सफारी ने उसे डीएफओ जगदलपुर के पत्र के बिना रख भी लिया.

तस्करी में जब्त सभी वन्यप्राणी जंगल सफारी में रहेंगेॽ

सिंघवी ने बताया कि अगर ऐसा ही चलता रहेगा तो वे वन्यजीव जो तस्करी की दौरान जब्त किए गए सारे वन्यप्राणी जंगल सफारी में पाए जाएंगे. उन्होंने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को प्रेषित पत्र में बताया गया कि वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई पूर्णता विधि विरुद्ध और वन्य प्राणियों के खिलाफ है. लेकिन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ने कोई कार्रवाई नहीं की है.

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