वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव पर रोक लगाने की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, इसलिए अब हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है। कोर्ट ने चुनाव से जुड़े विवादों का समाधान सही समय और मंच पर करने का निर्देश कहा है। याचिकाकर्ताओं ने महिला आरक्षण के साथ ही कार्यकारिणी का पद बढ़ाने को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस एनके चंद्रवंशी की कोर्ट में हुई।


दरअसल, बिलासपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के लिए 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में अध्यक्ष सहित 17 पदों के लिए 61 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। एडवोकेट निरूपमा वाजपेयी ने हाई कोर्ट में यााचिका दायर कर कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रशासक समिति द्वारा चुनाव प्रक्रिया को लेकर जारी अधिसूचना को चुनौती दी थी।
याचिका में कहा गया कि बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी 15 की थी, जिसे गलत तरीके से बढ़ाकर महिला आरक्षण तय किया गया है। जबकि, प्रशासक को कार्यकारिणी के पदों में वृद्धि करने का अधिकार नहीं है। केवल सामान्य सभा के जरिए ही पद बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है, सामान्य सभा की अनुमति जरुरी है। हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद, चुनावी प्रक्रिया जारी रखने पर उन्होंने आवेदन भी प्रस्तुत किया था, जिसमें चुनाव पर रोक लगाने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का कार्यकाल खत्म हो चुका है, जिसके चलते हाई कोर्ट और राज्य अधिवक्ता परिषद ने प्रशासक नियुक्त किया है। प्रशासक ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाई कोर्ट और राज्य अधिवक्ता परिषद से मार्गदर्शन लेकर चुनाव की प्रक्रिया शुरू की है। मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने कहा, चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई और मतदान की तारीख के साथ ही नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी हो चुकी है। ऐसे में चुनाव पर रोक नहीं लगाई जा सकती।


