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सुप्रिया पांडेय, रायपुर। 25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस के आला नेताओं की हत्या कर दी. न केवल प्रदेश बल्कि देश के जघन्यतम राजनीतिक हत्याकांड के पीछे की साजिश को जानने के लिए बनाए गए जांच आयोग की रिपोर्ट भले ही सामने न आई हो, लेकिन घटनाक्रम को लेकर आज तक सियासत जारी है. घटनाक्रम के 9वीं बरसी पर भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे पर हमला किया है.

भाजपा प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि अब तक सामने आ जानी चाहिए थी सत्यता, कांग्रेस की सरकार ही जांच में बन रही बाधा, वे अपने अनुकूल एसआईटी बनाकर जांच करवाना चाहती है, जिसे न्यायालय ने अभी स्टे दिया है अर्थात उनके कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया. रिपोर्ट को उन्होंने सार्वजनिक क्यों नहीं किया? यदि आपको रिपोर्ट में आपत्ति है तो आप कोर्ट जाइए. घटना के बाद साल भर तक धरातल पर चर्चा हुई है, कौन सी पार्टी के नेताओं पर उंगली उठी है? यह कांग्रेस को बेहतर तरीके से जानकारी है, हमारा आरोप है कि कांग्रेस बाधा बन रही है और अपने ही लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है..

बीजेपी के बयान पर कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस प्रभारी सचिव चंदन यादव ने कहा कि जिन वजहों से हमारे नेताओं की शहादत हुई है उसकी सच्चाई को सामने लाने के लिए कांग्रेस की सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. भाजपा को दिवंगत नेताओ के नाम पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. आज के दिन हम राजनीतिक बातें नहीं करेंगे, वे हमारे प्रेरणा श्रोत है, जिसे लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं.