प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति में कोई बाधा नहीं, मुख्यमंत्री बघेल की पहल पर कोयले की सुचारू आपूर्ति की बनी बात

रायपुर। प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति में कोई बाधा नहीं है. प्रदेश के ताप विद्युत संयंत्रों के लिए एसईसीएल प्रतिदिन 29 हजार 500 मीट्रिक टन कोयले की आपूर्ति करेगी. वहीं रेल्वे की ओर से छत्तीसगढ़ को कोयले और चावल की सप्लाई के लिए आवश्यकतानुसार पर्याप्त संख्या में रेक उपलब्ध कराए जाएंगे. कोयले की आपूर्ति एवं उपलब्धता को लेकर आहुत उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को रेलवे और एसईसीएल के आला अधिकारियों ने इस बात का आश्वासन दिया.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को राज्य के ताप विद्युत संयंत्रों में कोयला आपूर्ति एवं उपलब्धता की समीक्षा की. बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, सचिव सिद्धार्थ परदेशी, अंकित आनंद सहित राज्य विद्युत कंपनियों के प्रबंध निदेशकगण उपस्थित थे. बैठक में एससीएल के सीएमडी पांडा एवं रेल्वे के महाप्रबंधक आलोक कुमार विशेष रूप से उपस्थित थे.

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बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश में बिजली की औसत  डिमांड 3803 मेगावाट है, जिसके विरूद्ध उपलब्धता 3810 मेगावाट है. प्रदेश में पीक समय में विद्युत की औसत डिमांड 4123 मेगावाट है, जिसके विरूद्ध औसत उपलब्धता 4123 मेगावाट है. उपलब्धता बनाये रखने के लिए पीक समय में आवश्यकतानुसार 200 से 400 मेगावाट विद्युत क्रय की आवश्यकता पड़ रही है.

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बताया गया कि केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के मानक अनुसार पीट हेड के पावर प्लांटों में न्यूनतम 15 दिवस के संचालन के लिए पर्याप्त कोयला भंडारण होना चाहिए. 5 दिन से कम का कोयला उपलब्ध होने पर इसे क्रिटिकल स्थिति और 3 दिवस से कम का कोयला उपलब्ध होने पर इसे सुपर क्रिटिकल स्थिति माना जाता है. वर्तमान में डीएसपीएम संयंत्र में 3.8 दिवस का कोयला (क्रिटिकल), एचटीपीएस संयंत्रों में 3.2 दिवस का कोयला (क्रिटिकल) और मंडवा ताप विद्युत संयंत्र में 7 दिवस का कोयला उपलब्ध है.

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राज्य के ताप विद्युत संयत्रों को एसईसीएल से अगस्त से प्राप्त हो रहे कोयले का जीसीवी कम होने के कारण प्रतिदिन कोयले की आवश्यकता 29500 मीट्रिक टन हो गई है. इस आवश्यकता के विरूद्ध एसईसीएल द्वारा 23290 मीट्रिक टन (78 प्रतिशत) कोयला आपर्ति की जा रही है. इसमें सुधार की आवश्यकता है. एससीएल के सीएमडी पांडा ने आश्वस्त किया कि कोयले की आपूर्ति में तत्काल वृद्धि कर इसे प्रतिदिन 29500 मीट्रिक टन किया जाएगा. रेल्वे के महाप्रबंधक ने कोयला परिवहन के लिए पर्याप्त रेल रैक उपलब्धता कराने का आश्वस्त दिया.

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वार्षिक रखरखाव के लिए बंद पावर प्लांट

वर्तमान में एनटीपीसी की लारा (400 मेगावाट) एवं सीपत यूनिट (104 मेगावाट) के अलावा एनएसपीएल संयंत्र (25 मेगावाट) वार्षिक रखरखाव के कारण बंद है. इस कारण कुल 529 मेगावाट विद्युत कम प्राप्त हो रहा है. एनटीपीसी लारा यूनिट के कल से शुरू होने की संभावना है. यूनिट प्रारंभ होने पर एक्सचेंज से विद्युत क्रय की स्थिति लगभग नहीं रहेगी. वहीं एनटीपीसी सीपत यूनिट के 21 अक्टूबर तक तक प्रारंभ होने की संभावना है. शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत की निर्बाध सप्लाई की जा रही है.

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