राजकुमार पाण्डेय की कलम से

कमिश्नर साहब का मिलने से इनकार

जब जिलों में थे तब तो साहब आम लोगों से मुलाकातों पर खूब जोर देते थे, लेकिन जब से मंत्रालय में महत्वूपर्ण जिम्मेदारी मिली है, साहब ने आम लोगों से मुलाकात से पूरी तरह दूरी बना ली है. बिना अपॉइंटमेंट कोई पहुंच जाए तो साहब मिलते नहीं हैं और अपॉइंटमेंट के लिए महीनों-महीनों तक साहब समय देते नहीं. इस बात की चर्चा अब समकक्ष आईएएस अफसर भी करने लगे हैं कि यदि ऐसी ही दूरी बनी रही तो आम लोगों के स्वास्थ्य का क्या होगा. बता दें अपनी ईमानदार छवि के लिए साहब काफी चर्चित रहे हैं.

जबरन परिचय बढ़ाने में जुटे नए चेहरे

राजनीति का क्षेत्र निजी जीवन के तौर पर भी सार्वजनिक ही होता है, इसके लिए जितना परिचय बढ़ाया जाए उतना अच्छा ही है. लेकिन यह भी सही है कि अति सर्वत्र वर्जते… इस सैंधातिक नियम का कुछ चेहरे पालन करना भूल ही गए हैं. नई जिम्मेदारी क्या मिली घर, मोहल्ला, कार्यालय हो या कोई सार्वजनिक समारोह हर जगह बस एक ही काम कि नए पद का परिचय दिया जाए. एक ही मकसद नए पद के परिचय के साथ मिनटों में हर एक से मुलाकात हो जाए. अब इस बात की चर्चा समकक्ष नेता करने लगे हैं कि परिचय में कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन जबरन परिचय देते रहना भी राजनीति की गरिमा के अनुरूप नहीं है.

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पहले शिफ्टिंग फिर ट्रांसफर

सीनियर होने के साथ जमावट भी हो तो मनमाफिक पोस्टिंग मिल ही जाती है. इस फॉर्मूले में फिर बैठे एक अफसर की तो इतनी अधिक प्री-प्लानिंग रही कि तबादला सूची आने से पहले ही घर-गृहस्थी सब राजधानी में पूरी तरह शिफ्ट कर दी गई थी. जिले में सिर्फ साहब और उनका कुछ सामान ही बचा था. ये सब कुछ इतना गोपनीय रखा गया था कि निवास में काम करने वालों के सिवाय शिफ्टिंग की किसी को कानो-कान खबर नहीं लग सकी थी. अब निवास वाले कर्मचारी ही प्री-प्लान का खुलासा कर रहे हैं.

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आदिवासी होने का नेताजी उठा रहे जमीनी फायदा

कानूनी तौर पर आदिवासी वर्ग के लिए कई रियायतें दी गई हैं. साथ ही आदिवासियों की जमीन कोई जबरन हड़प न सके, इसके लिए भी कड़े कानूनी नियम हैं. मध्य प्रदेश के एक बड़े नेता आदिवासियों की जमीनें तो खूब कब्जा रहे हैं, लेकिन उन पर कोई कानून काम नहीं कर पा रहा है. कारण है नेताजी ठहरे उसी वर्ग के. अब नेताजी नियमों के साथ गरीब आदिवासियों की जमीनें अपने परिवार के नाम करवाते जा रहे हैं. नेताजी की ये कारस्तानी भले ही उजागर होने लगी हो, लेकिन सरकारी नियमों में सब लीगल होने से नेताजी को भविष्य में भी किसी तरह की कोई कानूनी कार्रवाई होने का डर नहीं है.

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