प्रयागराज. मौनी अमावस्या के अवसर पर शनिवार को संगम पर स्नानार्थियों की भीड़ उमड़ पड़ी. श्रद्धालु बड़ी संख्या में डुबकी लगाने के लिए पहुंचे जिसके कारण संगम पर गहमागहमी की स्थिति हो गई थी. इसी बीच ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भी संगम पहुंचे थे. लेकिन भीड़ ज्यादा होने की वजह से प्रशासन ने उन्हें रोक दिया. प्रशासन ने उनसे रथ से उतरकर पैदल जाने का आग्रह किया. इस पर उनके भक्तों और पुलिस के बीच विवाद शुरू हो गया था. जिसके बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अनशन पर बैठ गए. जो कि आज दूसरे दिन भी जारी है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रोटोकॉल के साथ गंगा स्नान की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि प्रशासन प्रोटोकॉल के साथ गंगा स्नान कराए. शनिवार को ज्योतिष्पीठाधीश्वर पालकी से भक्तों के साथ स्नान करने जा रहे थे. इसी बीच हंगामा हुआ था. उन्होंने पुलिस प्रशासन पर शिष्यों से धक्का मुक्की करने और मारपीट करने का आरोप लगाया है. पुलिस ने कल उन्हें संगम से वापस लौटा दिया था. जिसके बाद से ही वे अनशन पर बैठे हैं.

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बता दें कि कल घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके चलते शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संगम में स्नान करने से इनकार कर दिया. स्थिति को संभालने के लिए मौके पर पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके. प्रशासन लगातार भीड़ को नियंत्रित करने और संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में जुटा हुआ था.

इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. जिसमें साफ देखा जा सकता है कि पुलिस किस तरह से शंकराचार्य से शिष्य को घसीट रही है. बालकर पकड़कर खींचा जा रहा है. इस प्रकरण को लेकर अखिलेश यादव ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा था. उन्होंने एक पोस्ट साझा किया था कि ‘साधु-संतो, भक्तों-श्रद्धालुओं के साथ अप्रिय व्यवहार का समाचार दुखद है. भाजपा सरकार ‘दिव्य-भव्य’ के दावे से पहले ‘सभ्य’ बने’.