होली का त्यौहार नजदीक आते ही घर के बड़े बुजुर्ग कहते थे घर से बाहर निकलते समय सावधान रखना. सड़क पर कोई चीज को लांघना नहीं या बच्चों से कहा जाता था, कोई कुछ दे तो उसे खाना नहीं… मान्यता है कि होली तक नकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती हैं, इसलिए इस अवधि में विशेष सावधानी बरतने जरूरी होता है. खासकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को लेकर घरों में दादी-नानी कई पारंपरिक उपाय अपनाती रही हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होली के 8 दिन पहले का समय शुभ कार्यों से परहेज और साधना-उपासना का होता है. घरों में पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण कर सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने पर जोर दिया जाता है.

मान्यता है कि इस दौरान किए गए कुछ उपायों से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है. घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है.
बचाव के लिए बताए गए प्रमुख उपाय
- ओम या हनुमान जी का लॉकेट का ताबीज पहनाएं.
- हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, रामचरितमानस का पाठ करें.
- दुर्गा सप्तशती (कवच, अर्गला, कीलक) का पाठ करें.
- गर्भवती महिलाओं और बच्चों को घर के अंदर रखें.
- अनावश्यक बाहर जाना टालें.
- तकिए के नीचे चाकू या घोड़े की नाल रखें.
- छोटे बच्चे के माथे या कान के पीछे काला टीका लगाएं.
- भीड़भाड़ और विवाद से दूर रखें.
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