अमृतसर. पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 79(2)(a) में प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में एक स्थायी अध्यक्ष और चार स्थायी सदस्य होंगे, जिनमें से प्रत्येक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश से होगा, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा। वर्तमान में केवल पंजाब और हरियाणा के दो स्थायी सदस्य हैं।
केंद्र सरकार ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य बीबीएमबी का पुनर्गठन करना है। यह कदम इस अंतरराज्यीय बोर्ड में पंजाब की भूमिका और ताकत को कम कर सकता है। वर्तमान में बीबीएमबी में केवल पंजाब और हरियाणा के दो स्थायी सदस्य हैं। हालांकि, केंद्र अब हिमाचल प्रदेश और राजस्थान को प्रतिनिधित्व देकर बोर्ड में सदस्यों की संख्या चार करना चाहता है।
यह प्रस्ताव केंद्र द्वारा बीबीएमबी में सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ जवानों की तैनाती के कुछ हफ्तों बाद आया है। पंजाब सरकार इस फैसले का विरोध कर रही है। पंजाब और हरियाणा में पानी के वितरण को लेकर बीबीएमबी इस साल अप्रैल से ही चर्चा में है। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब पंजाब सरकार ने हरियाणा को अतिरिक्त पानी छोड़े जाने का विरोध किया। इस दौरान पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के बीच पानी के वितरण को लेकर बैठकों का दौर भी चला। इसके बाद पंजाब में आई बाढ़ को लेकर भी कई विशेषज्ञों ने बीबीएमबी पर सवाल उठाए थे।

बीबीएमबी दो बांधों, भाखड़ा और पौंग बांध के प्रशासन, रखरखाव और संचालन का कार्य करता है। यह भाखड़ा, नंगल और ब्यास परियोजना के माध्यम से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और चंडीगढ़ को पानी और बिजली की आपूर्ति को नियंत्रित करता है। केंद्र सरकार ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश को पत्र लिखा है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने संशोधन का प्रस्ताव रखा है और सहयोगी राज्यों से प्रतिक्रिया मांगी है।
अधिनियम की धारा 79(2)(a) में प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, बीबीएमबी में एक स्थायी अध्यक्ष और चार स्थायी सदस्य होंगे, जिनमें से प्रत्येक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश से होगा, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा। वर्तमान में केवल पंजाब और हरियाणा के दो स्थायी सदस्य हैं।
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