दिल्ली सरकार ने राजधानी में पर्यावरणीय ढांचे को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने का दावा किया है। इसी क्रम में शहर में नई कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (CBWTF) स्थापित करने की योजना बनाई गई है, ताकि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले जैव-चिकित्सीय कचरे का सुरक्षित निपटान सुनिश्चित किया जा सके। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (NPC), पर्यावरण विभाग और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में बायो-मेडिकल कचरे के वैज्ञानिक निपटान, प्रदूषण नियंत्रण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई सुविधाओं की स्थापना पर चर्चा की गई।
प्रेजेंटेशन में बायोमेडिकल कचरे की वर्तमान और भविष्य की अनुमानित मात्रा, प्रस्तावित संयंत्रों की तकनीकी विशेषताओं और परियोजना के कार्यान्वयन की रूपरेखा पर विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इस समय दिल्ली के पूर्व, उत्तर, पश्चिम, दक्षिण और मध्य क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 40 टन बायोमेडिकल कचरा उत्पन्न हो रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और बढ़ती आबादी के चलते वर्ष 2031 तक इस कचरे की मात्रा में और वृद्धि होने का अनुमान है। इसी को ध्यान में रखते हुए नई कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (CBWTF) स्थापित करने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुसार सुरक्षित और वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित किया जा सके।
46 टन कचरे को संभालने में सक्षम
अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित नए CBWTF प्रतिदिन लगभग 46 टन बायोमेडिकल कचरा संभालने में सक्षम होंगे। यह क्षमता करीब 2300 किलोग्राम प्रति घंटा के हिसाब से 20 घंटे के संचालन पर आधारित है, जिससे राजधानी में बढ़ते कचरे के दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। बैठक में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को बताया गया कि पहले केवल दो संयंत्र पूरे दिल्ली के सभी जिलों को कवर करते थे, जिसके कारण कचरा प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता था। अब प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक संयंत्र तीन-तीन जिलों को कवर करेगा, जिससे कचरे के संग्रह, परिवहन और उपचार की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और समर्पित हो सकेगी।
नए पार्टनर्स को आमंत्रित करेगी सरकार
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि सरकार इस परियोजना के लिए अत्याधुनिक तकनीक और पर्यावरण मानकों का पालन करने वाले नए पार्टनर्स को आमंत्रित करेगी। बैठक के दौरान मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल वही कंपनियां चयनित होंगी जो नवीनतम तकनीक से लैस हों और सभी वैधानिक पर्यावरण मानकों का कड़ाई से पालन करने में सक्षम हों। उन्होंने कहा, “हम सर्वोच्च स्तर की तकनीक रखने वाली कंपनियों को अवसर देंगे, जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा।”
पर्यावरण पर प्रभाव होगा कम
प्रस्तावित कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (CBWTF) पूर्व/उत्तर-पूर्व/शाहदरा और पश्चिम/दक्षिण-पश्चिम/मध्य क्षेत्रों को कवर करेंगे। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि इन आधुनिक संयंत्रों में ऑटोक्लेविंग, श्रेडिंग और सुरक्षित लैंडफिल जैसी उन्नत प्रक्रियाओं के जरिए अलग-अलग किए गए बायोमेडिकल कचरे का उपचार किया जाएगा। इससे संक्रमण और प्रदूषण के खतरे को कम करने के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
जनस्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा, “बायोमेडिकल कचरे का सही निपटान दिल्ली के नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। अनियंत्रित कचरा गंभीर खतरा बन सकता है, जिसे हम सख्ती से रोक रहे हैं।” उन्होंने इसे प्रदूषण के प्रति सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के अनुरूप बताया। मंत्री के अनुसार स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली के लिए प्रभावी कचरा प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत करने के लिए दैनिक मॉनिटरिंग डैशबोर्ड भी स्थापित किए जाएंगे, जिससे संयंत्रों के संचालन और कचरे के निपटान की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जा सके।
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