अभिषेक सेमर, तखतपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत गरीबों को पक्का मकान देने का सपना दिखाया गया था, लेकिन तखतपुर जनपद पंचायत क्षेत्र में यही योजना कई परिवारों के लिए आर्थिक संकट, मानसिक पीड़ा और प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल बनती जा रही है।

तखतपुर जनपद पंचायत में ग्राम दर्री और उसके आश्रित ग्राम खटोला में ऐसे कई हितग्राही सामने आए हैं, जिन्होंने आवास निर्माण के लिए खेती की जमीन गिरवी रख दी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें योजना की एक भी किश्त अब तक नहीं मिली।

किश्त नहीं मिली, बढ़ता गया कर्ज का बोझ

बता दें कि यहां अपना आवास निर्माण पूरा करने के लिए हितग्राहियों को साहूकारों और निजी संस्थानों से कर्ज लेना पड़ा। ऊंची ब्याज दर पर ली गई रकम अब उनके लिए भारी पड़ रही है। कई परिवारों की हालत ऐसी है कि वे सिर्फ ब्याज भी चुकाने में असमर्थ हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो उन्हें अपनी जमीन बेचनी पड़ेगी या फिर बने हुए मकान से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

एक साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहे ग्रामीण, लेकिन मिला सिर्फ आश्वासन

हितग्राही रामायण ध्रुव, गायत्री बाई और नारद गोंड ने बताया कि वे पिछले एक साल से अधिक समय से जनपद पंचायत, ब्लॉक कार्यालय और आवास शाखा के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि जियो टैगिंग, निर्माण प्रगति और सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद भुगतान रोका गया है। किसी अधिकारी द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि किश्त आखिर किस कारण अटकी हुई है।

शिकायतों के बाद रायपुर से पहुंची जांच टीम

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) संचालनालय, रायपुर से दो सदस्यीय जांच टीम ग्राम दर्री पहुंची। टीम ने कुछ चयनित हितग्राहियों के घर जाकर बयान दर्ज किए और निर्माणाधीन व पूर्ण आवासों का भौतिक सत्यापन किया। हालांकि, जांच के दौरान टीम का रवैया ग्रामीणों को निराशाजनक लगा।

मीडिया सवालों से बचती नजर आई जांच टीम

जांच के दौरान जब मीडिया ने भुगतान और गड़बड़ियों को लेकर सवाल पूछे, तो जांच टीम ने जांच पूरी नहीं होने का हवाला देकर कोई जवाब देने से इनकार कर दिया। इससे ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं में असंतोष देखा गया।

पंचायत भवन में इंतजार करते रह गए हितग्राही, लेकिन नहीं पहुंची टीम

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जांच टीम ने पंचायत भवन जाकर सामूहिक रूप से हितग्राहियों की शिकायतें सुनना तक जरूरी नहीं समझा।

सुबह से पंचायत भवन में कई आवास हितग्राही अपनी फरियाद लेकर बैठे रहे, लेकिन टीम ने केवल तीन से चार घरों का निरीक्षण कर लौट जाना उचित समझा। ग्रामीणों का आरोप है कि इस तरह की सीमित जांच से सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी।

हितग्राहियों ने बयां किया अपना दर्द

ग्राम खटोला की हितग्राही गायत्री बाई ने बताया कि उन्होंने अपना खेत गिरवी रखकर मकान का निर्माण शुरू किया। मकान अब छत ढलने के स्तर तक पहुंच चुका है, लेकिन अब तक एक भी किश्त नहीं मिली। गांव का सचिव रिश्तेदार होने के बावजूद केवल “जल्द आ जाएगी” कहकर टालता रहा।

वहीं एक अन्य हितग्राही नारद गोंड ने बताया कि उन्हें पहली किश्त 40 हजार रुपये डेढ़ साल पहले मिली थी। अब मकान की छत ढल चुकी है, लेकिन दूसरी किश्त आज तक नहीं आई। उन्होंने 10–12 बार जनपद पंचायत की आवास शाखा में शिकायत की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला।

अधिकारी रहे मौजूद, लेकिन नहीं हुआ कोई समाधान

गौरतलब है कि निरीक्षण के दौरान जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सत्यव्रत तिवारी, तकनीकी सहायक, सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। हितग्राहियों को उम्मीद थी कि मौके पर समाधान निकलेगा, लेकिन ऐसा कुछ होता नजर नहीं आया।

सिर्फ तखतपुर में ही ऐसे हजारों मामलों के सामने आने की आशंका

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और गंभीरता से की गई, तो तखतपुर जनपद क्षेत्र में हजारों ऐसे मामले सामने आ सकते हैं, जिनमें मकान तो बन चुके हैं, लेकिन किश्त की राशि अब तक जारी नहीं हुई है।

क्या जांच के बाद दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई ? या फाइलों में दबकर रह जाएगा मामला

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच के बाद दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या यह मामला भी अन्य जांचों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीबों को सिर पर छत देना था, लेकिन तखतपुर में यही योजना गरीबों के लिए कर्ज, तनाव और प्रशासनिक उपेक्षा की पहचान बनती जा रही है।

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