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रायपुर. सिम्स ऑडिटोरियम बिलासपुर में 25 मई को श्रीकांत वर्मा पीठ बिलासपुर ने श्रीकांत वर्मा का साहित्यियिक अवदान विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया. शुभारभ सत्र में श्रीकांत वर्मा की बहू एंका वर्मा अतिथि थीं. उन्होंने पीठ की पहल को अनोखा और अविस्मरणीय बताया.

प्रथम व्याख्यान सत्र की अध्यक्षता साहित्यकार एवं संभागायुक्त बिलासपुर डॉ. संजय अलङ्ग ने की. उन्होंने कहा कि श्रीकांत वर्मा समकालीन कविता कवियों में अत्यधिक झकझोरने और उद्वेलित करने वाले कवि हैं. सत्र की अध्यक्षता करते वरिष्ठ साहित्यकार नरेश सक्सेना ने कहा कि श्रीकांत जी की कविता में एक लय है. उसमें अपने समय से सच्चा संवाद है. दिल्ली से आए श्रीकांत वर्मा के समकालीन सहचर साहित्यकार विनोद भरद्वाज ने उनके साथ अपने बेहतरीन संस्मरण सुनाए.

चर्चित युवा साहित्यकार गीत चतुर्वेदी ने कहा कि श्रीकांत जी अपनी कविता में सत्ता में रहकर सत्ता द्वंद करते है. भरतीय सिनेमा में नाराज नायक के आने से पहले नाराज कवि के रूप में प्रतिष्ठित हो चुके थे. दुर्ग से आए वरिष्ठ साहित्यकार जयप्रकाश ने उनके काव्य यात्रा हिंदी साहित्य में योगदान को रेखांकित किया. महेश वर्मा ने सत्र का संचालन किया.


काव्य पाठ से श्रोताओं को किया भाव विभोर
लखनऊ से आए सुविख्यात कवि नरेश सक्सेना ने काव्य पाठ किया. उन्होंने काव्य पाठ करते कहा कि चीजों के गिरने के नियम होते हैं! मनुष्यों के गिरने के कोई नियम नहीं होते, लेकिन चीजें कुछ भी तय नहीं कर सकती, अपने गिरने के बारे में मनुष्य कर सकते हैं. प्रख्यात कवि विनोद भारद्वाज ने कविताओं का पाठ किया. नामचीन कवि गीत चतुर्वेदी ने एक कश्मीरी बच्चे का खत… नीम का पौधा.. पुल गिरने से मरे आदमी का घर…चार वचन..खिलाई गई रोटी और दिए गए चुम्बन गिने नहीं जाते..सुना हुआ सहगीत और खोया हुआ प्रेम लौटकर जरूर वापस आते हैं..आदि कविताओं से श्रोताओं को भाव विभोर किया.

श्रीकांत की कविताओं को दिया नया स्वर
विनय साहिब ने भी अपनी रचनाएं सुनाईं. देश की नामचीन कवयित्री विश्वासी एक्का अम्बिकापुर ने जंगल, आदिवासी और छतीसगढ़ को रेखांकित करती रचनाएं सुनाईं. उनकी कविता सतपुड़ा के जंगल, लक्ष्मनिया का चूल्हा, बुधिया आदि को श्रोताओं ने खूब पसंद किया. आगरा से आईं जोशना बैनर्जी आडवानी ने भात शीर्षक कविता से अपना पाठ शुरु किया. अंतिम सत्र में राजकमल नायक के निर्देशन में श्रीकांत की कविताओं की रंग प्रस्तुति हुई. इसमें कोसल गणराज्य, कोसल में विचारों की कमी,कोसल की शैली, काशी का न्याय, हस्तक्षेप, नियम और आठ कविताओं के अंश में श्रीकांत की कविताओं को नया स्वर दिया.